विकास के वादों में दब गया नैनपुर: जनता अब भी इंतजार में, नेता नदारद!

वोट लेकर भूल गए नेता, नैनपुर अब भी तरस रहा है विकास के लिए

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला, जिले के विकास खण्ड नैनपुर नगर, जो मध्यप्रदेश के मंडला जिले में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है, आज खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। चुनावों के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब नज़र नहीं आ रहे। सोशल मीडिया पर चकाचौंध करने वाले पोस्ट, रैलियों में गूंजते वादे और झूठी तस्वीरें सब अब इतिहास बन चुके हैं। नैनपुर की जनता आज भी उसी जगह खड़ी है, जहाँ वर्षों पहले थी प्रगति और बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर।

नैनपुर को मिले उसकी पहचान, कब बनेगा नैनपुर जिला और विधानसभा?

नैनपुर जैसे बड़े, जागरूक और आर्थिक रूप से संपन्न नगर को अभी तक जिला और विधानसभा का दर्जा नहीं मिल पाया है। गोपनीय सूत्रों के अनुसार घुघरी विधानसभा का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन नैनपुर का नाम तक नहीं लिया जा रहा। सवाल यह है कि नैनपुर की आवाज आखिर कब तक दबाई जाती रहेगी?

सवालों की झड़ी: जवाब कौन देगा?
केंद्रीय विद्यालय का क्या हुआ?*l

वर्षों से नैनपुर में केंद्रीय विद्यालय खोलने की माँग उठ रही है। फाइल कहाँ तक पहुँची? क्या अब भी धूल खा रही है?

सिवनी फाटक ओवरब्रिज प्रोजेक्ट की स्थिति क्या है?

इस प्रोजेक्ट पर सिर्फ चर्चा हुई है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं हुआ। जनता जानना चाहती है कि यह मंजूरी के किस चरण में है?

नैनपुर-बिलासपुर और नैनपुर-दिल्ली सीधी ट्रेन कब?

यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए सीधी ट्रेन की ज़रूरत है। लेकिन इस पर कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया।

सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति कब?

नैनपुर के सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद वर्षों से खाली हैं। कब तक जनता को अधूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहेंगी?

खेल मैदान सिर्फ एक, बाकी सुविधाएं शून्य!

रेलवे का जेआरसी मैदान ही एकमात्र सहारा है खिलाड़ियों का। क्या नैनपुर में एक आधुनिक स्टेडियम की योजना नहीं बन सकती?

एमएससी की कक्षाओं के लिए आंदोलन व्यर्थ?

नैनपुर कॉलेज के छात्रों ने कई बार एमएससी संकाय की मांग की। क्या उनका आंदोलन सिर्फ फोटो तक सीमित रह गया?

क्या नैनपुर सिर्फ व्हाट्सएप पोस्टों से बनेगा प्रगतिशील?

सोशल मीडिया पर सक्रिय कुछ स्थानीय नेता नैनपुर को रातोंरात सिंगापुर बनाने के दावे करते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। व्हाट्सएप पर विकास नहीं होता, उसके लिए चाहिए नीतिगत फैसले, बजट और ईमानदारी।

जनता के साथ छलावा: कब जागेगी नैनपुर की भोली जनता?

नैनपुर की जनता हर चुनाव में वोट देती है, फिर चुप बैठ जाती है। यह चुप्पी ही सबसे बड़ा हथियार बन गई है नेताओं के लिए, जो चुनाव के बाद नज़र नहीं आते। जब तक जनता सवाल नहीं करेगी, तब तक विकास का झुनझुना ही सुनाया जाएगा।

वही अब वक्त आ गया है कि नैनपुर की जनता अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो। विकास केवल वादों से नहीं, जनता की जागरूकता और नेतृत्व के दबाव से आता है। सवाल पूछना बंद नहीं होना चाहिए—क्योंकि जब जनता सवाल पूछती है, तभी नेता जवाब देने को मजबूर होते हैं।

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