एकादशी व्रत कथा बुधवार

दैनिक रेवांचल टाईम्स – षटतिला एकादशी से जुड़ी एक बड़ी ही दिलचस्प कथा है। महाभारत में अर्जुन ने श्रीकृष्ण से एकादशी व्रतों का महत्व पूछा था। तब श्रीकृष्ण ने माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनाई, जिसे षटतिला एकादशी कहते हैं। इस कथा के अनुसार, इस प्रकार मनुष्य जितने तिलों का दान करता है, वह उतने ही सहस्र वर्ष स्वर्ग में वास करता है। षटतिला एकादशी की यह कथा पद्म पुराण में वर्णित है। प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक अत्यंत धर्मपरायण स्त्री रहती थी। वह नियमित व्रत और पूजा-पाठ करती थी किंतु दान नहीं करती थी। विशेष रूप से वह किसी को अन्न या धन दान नहीं देती थी। एक दिन भगवान विष्णु ब्राह्मण का वेश धारण कर उसके द्वार पहुँचे और दान माँगा। स्त्री ने कहा कि मेरे पास देने के लिए कुछ नहीं है। बाद में उसने घर की मिट्टी उठाकर दान में दे दी। भगवान विष्णु उसे आशीर्वाद देकर चले गए। कुछ समय बाद उस स्त्री की मृत्यु हो गई और वह स्वर्ग पहुँची। वहाँ उसे विशाल महल मिला, ऐश्वर्य मिला लेकिन भोजन नहीं मिला। वह अत्यंत दुखी होकर भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगी। तब भगवान विष्णु प्रकट हुए और बोले – “तुमने जीवन में दान तो किया, लेकिन कभी अन्नदान नहीं किया। इसलिए तुम्हें ऐश्वर्य तो मिला, लेकिन अन्न नहीं”। फिर भगवान ने उपाय बताते हुए कहा कि माघ कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी का व्रत करो और तिल का छह प्रकार से प्रयोग करो। स्त्री ने विधिपूर्वक षटतिला एकादशी का व्रत किया। इसके फलस्वरूप उसके सभी पाप नष्ट हुए और उसे अन्न, धन और सुख की प्राप्ति हुई। अंततः उसने वैकुण्ठ धाम को प्राप्त किया।
* *पं मुकेश जोशी 9425947692*

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