अक्सर जब हम थकान महसूस करते हैं या खाली बैठे होते हैं तो अनजाने में अपनी उंगलियां चटकाने लगते हैं। बड़े-बुजुर्ग हमेशा इसे अशुभ या हड्डियों के लिए बुरा बताकर टोकते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उंगलियां चटकाते समय जो आवाज आती है वह असल में होती किस चीज की है और क्या इससे वाकई बुढ़ापे में हाथ कांपने या गठिया होने का खतरा रहता है।
क्यों आती है कड़क की आवाज
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि यह आवाज हड्डियों के आपस में टकराने से आती है लेकिन विज्ञान कुछ और ही कहता है। हमारी उंगलियों के जोड़ों के बीच एक साइनोवियल फ्लूइड होता है जो ल्यूब्रिकेंट (ग्रीस) का काम करता है। इसमें ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड गैसें घुली होती हैं। जब हम उंगलियों को खींचते या चटकाते हैं तो जोड़ों के बीच वैक्यूम बनता है और गैस के बुलबुले फूटते हैं। यही बुलबुले फूटने की आवाज हमें कड़क सुनाई देती है।
क्या इससे गठिया होता है?
यह सबसे बड़ा मिथक है। कैलिफोर्निया के एक डॉक्टर डोनाल्ड अनगर ने इस पर एक अनोखा प्रयोग किया था। उन्होंने 60 साल तक अपने बाएं हाथ की उंगलियां चटकाईं और दाएं हाथ को कभी नहीं छुआ। 60 साल बाद जब उन्होंने जांच की तो दोनों हाथों में कोई अंतर नहीं था और उन्हें गठिया भी नहीं हुआ। इसके लिए उन्हें इग नोबेल पुरस्कार भी मिला।
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि उंगलियां चटकाने और अर्थराइटिस के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। लेकिन जिन लोगों को पहले से ही समस्या है उनके लिए उंगलियां चटकाना सही नहीं माना जाता है।
कब हो सकता है खतरा
भले ही उंगलियां चटकाना सामान्य तौर पर नुकसानदायक नहीं है लेकिन अगर चटकाते समय आपको दर्द, सूजन या जकड़न महसूस हो तो यह लिगामेंट इंजरी या जोड़ों की समस्या का संकेत हो सकता है। बार-बार जोर लगाकर उंगलियां चटकाने से ग्रिप (पकड़) की मजबूती कम होने की संभावना बनी रहती है।
विज्ञान के अनुसार उंगलियां चटकाना कोई गंभीर खतरा नहीं है लेकिन इसे जुनून बनाना गलत है। अगर आपको दर्द नहीं है तो बेफिक्र रहें।