दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती अन्नपूर्णा तिवारी को ऋषि वैदिक विद्यापीठ द्वारा मानद् डॉक्टरेट (आनरेरी पीएचडी) की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट सृजन, सतत लेखन और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में उनके विशिष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
ऋषि वैदिक विद्यापीठ द्वारा आयोजित गरिमामयी समारोह में श्रीमती अन्नपूर्णा तिवारी के साहित्यिक अवदान को रेखांकित करते हुए कहा गया कि उन्होंने अपने रचनात्मक कार्यों के माध्यम से न केवल साहित्य को समृद्ध किया है, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का भी कार्य किया है। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार, नारी सशक्तिकरण, सांस्कृतिक मूल्य और मानवीय संवेदनाएँ प्रमुख रूप से देखने को मिलती हैं।
साहित्यिक क्षेत्र में विशिष्ट पहचान
श्रीमती अन्नपूर्णा तिवारी लंबे समय से साहित्य साधना में सक्रिय हैं। कविता, लेखन और विचारात्मक सृजन के माध्यम से उन्होंने हिंदी साहित्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। उनके लेखन की विशेषता सरल भाषा, गहन भावबोध और समाज से जुड़ी विषयवस्तु है, जिससे पाठक सहज रूप से जुड़ पाते हैं।
साहित्यिक यात्रा के दौरान उन्हें देश के विभिन्न साहित्यिक मंचों से सम्मान प्राप्त हो चुका है। अब तक उन्हें ‘नारी रत्न’, ‘हिंदी गौरव’, ‘काव्य मणि’, ‘काव्य रत्न’ सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। यह सभी सम्मान उनकी साहित्यिक प्रतिबद्धता और सतत सृजनशीलता के प्रमाण हैं।
डॉ. (विद्या वाचस्पति) की उपाधि से विभूषित
मानद् डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त होने के पश्चात अब श्रीमती अन्नपूर्णा तिवारी अपने नाम के साथ डॉ. (विद्या वाचस्पति) का उल्लेख कर सकेंगी। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन का गौरवपूर्ण क्षण है, बल्कि क्षेत्रीय साहित्य जगत के लिए भी सम्मान की बात है।
शुभचिंतकों ने दी बधाई
इस सम्मान की घोषणा के बाद परिवारजनों, साहित्य मित्रों, विद्यार्थियों और शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है। सभी ने श्रीमती तिवारी को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएँ एवं बधाई प्रेषित करते हुए उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना की है। कई साहित्यकारों ने इसे हिंदी साहित्य के लिए गर्व का क्षण बताया है।
श्रीमती अन्नपूर्णा तिवारी की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के साहित्य साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उनका सतत लेखन, साहित्य के प्रति समर्पण और सामाजिक चेतना से जुड़ा सृजन निश्चित ही हिंदी साहित्य को आगे भी समृद्ध करता रहेगा।