स्ट्रोक या ब्रेन अटैक एक ऐसी जानलेवा स्थिति है जिसमें मस्तिष्क तक खून की सप्लाई रुक जाती है। समय पर इलाज न मिलना स्थायी विकलांगता या मौत का कारण बन सकता है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने अब बचाव नामक एक विशेष फॉर्मूला जारी किया है जिससे आम आदमी भी स्ट्रोक के लक्षणों को पहचान सकता है।
स्वास्थ्य जगत में ब्रेन स्ट्रोक को साइलेंट किलर माना जाता है क्योंकि यह बिना किसी चेतावनी के अचानक हमला करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रोक के मामले में समय ही मस्तिष्क है क्योंकि देरी होने पर हर मिनट लाखों ब्रेन सेल्स मर जाते हैं। इस खतरे को देखते हुए नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने लक्षणों की त्वरित पहचान के लिए बचाव फॉर्मूला साझा किया है।
ब (बाजू): यदि व्यक्ति की बाहों में कमजोरी महसूस हो। जांच के लिए दोनों हाथ ऊपर उठाने को कहें यदि एक हाथ नीचे गिर जाए तो यह स्ट्रोक का संकेत है।
च (चेहरा): व्यक्ति को मुस्कुराने के लिए कहें। यदि चेहरा एक तरफ से लटक जाए या टेढ़ा दिखे तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
आ (आवाज): बोलने में कठिनाई होना। यदि व्यक्ति तुतला रहा हो या सरल वाक्यों को दोहराने में असमर्थ हो तो यह बड़ा खतरा है।
व (वक्त): यदि ऊपर के कोई भी लक्षण दिखें तो वक्त बर्बाद न करें। तुरंत 108 नंबर पर कॉल करें और ऐसे नजदीकी अस्पताल पहुंचें जहां सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध हो।
गोल्डन ऑवर की अहमियत
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार स्ट्रोक आने के शुरुआती कुछ घंटे गोल्डन ऑवर कहलाते हैं। यदि मरीज को सही समय पर अस्पताल पहुंचाया जाए तो क्लॉट-बस्टिंग दवाओं के जरिए मस्तिष्क के नुकसान को रोका जा सकता है और मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।
बचाव और सावधानियां
स्ट्रोक का खतरा शरीर के एक तरफ के हिस्से को अधिक प्रभावित करता है। इसके अन्य लक्षणों में अचानक संतुलन खोना, आंखों के सामने धुंधलापन या असहनीय सिरदर्द शामिल है। जीवनशैली में सुधार जैसे—ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और संतुलित आहार के जरिए इस जानलेवा हमले से 90% तक बचा जा सकता है।