लूट लो जनता को, शासन बना है संरक्षक!…पेट्रोल पंपों पर खुली मनमानी, प्रशासन की मिलीभगत या मुर्दा संवेदना?

 

मध्यप्रदेश के मंडला और जबलपुर जिलों में पेट्रोल पंप अब केवल ईंधन नहीं बेच रहे, बल्कि आम नागरिकों की जेब काटने के वैध ठिकाने बन चुके हैं। स्थिति इतनी शर्मनाक हो चुकी है कि खुलेआम पेट्रोल कम मात्रा में दिया जा रहा है, सुविधाओं का नामोनिशान नहीं और विरोध करने पर ग्राहकों से बदसलूकी तक की जा रही है। पर सरकार और प्रशासन — जैसे सब कुछ आंखें मूंद कर देख रहे हों

गड़बड़ियों का गढ़ बन चुके पेट्रोल पंप

  • कम मात्रा में पेट्रोल – ग्राहकों को 500 का पेट्रोल लेने पर भी गाड़ी दो किलोमीटर नहीं चलती!

  • हवा-पानी गायब – कई पंपों पर हवा भरने की मशीनें जंग खा रही हैं, पीने का पानी तक नहीं।

  • टॉयलेट और छाया की सुविधा नहीं – महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह पंप “सजायाफ्ता यातना केंद्र” बन चुके हैं।

  • शिकायत पर धमकी – कुछ पंप संचालक ग्राहक से ही उलझ जाते हैं, जैसे कानून उन्हीं की जेब में हो।

प्रशासन क्यों बना है ढाल?

प्रश्न यह है कि यह सब कब से हो रहा है और प्रशासन अब तक चुप क्यों है? क्या पेट्रोल पंप संचालकों को सरकारी संरक्षण प्राप्त है? क्या खाद्य विभाग, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि इन पंपों की “कट” में हिस्सेदार हैं? जब आम जनता को खुल्लम-खुल्ला लूटा जा रहा है, तब जिम्मेदारों की चुप्पी क्या सिर्फ संयोग है या सुनियोजित षड्यंत्र?

जनता के धैर्य की भी हद होती है!

ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के नागरिकों में भारी आक्रोश है। जनता पूछ रही है:
  क्या हम सिर्फ टैक्स भरने और लूटे जाने के लिए ही हैं?
  क्या पेट्रोल पंपों की जांच सिर्फ चुनावी जुमला थी?
  क्यों एक भी दोषी पर कार्रवाई नहीं होती?

अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तय

जनता ने चेताया है कि यदि जल्द ही:

  • सभी पेट्रोल पंपों की सघन जांच नहीं हुई

  • हवा-पानी-शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य नहीं की गईं

  • और घटतौली व भ्रष्टाचार पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई
    तो आमजन सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

 

मंडला और जबलपुर के पेट्रोल पंप अब सुविधा केंद्र नहीं, सरकारी संरक्षित लूट के अड्डे बन चुके हैं। प्रशासन की निष्क्रियता और नेताओं की चुप्पी इस बात का साफ संकेत है कि यह सब सिर्फ ‘लाइसेंसधारी लूट’ नहीं, बल्कि भ्रष्ट शासन की देन है। जनता अब सवाल नहीं, जवाब चाहती है।

 

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