दैनिक रेवाँचल टाईम्स मंडला।मध्यप्रदेश के मंडला जिले की नैनपुर तहसील में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की जमीनी हकीकत सरकार के दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। एक ओर सरकार योजनाओं की सफलता के उत्सव मनाने में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर कई पात्र किसान आज भी इस योजना की एक-एक किस्त के लिए भटकने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग की लापरवाही और उदासीनता के कारण अनेक किसानों के नाम सूची में शामिल ही नहीं किए गए, जबकि उन्होंने समय पर आवेदन और सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए थे। कई मामलों में तकनीकी त्रुटियों का हवाला देकर किसानों की पात्रता को महीनों से लंबित रखा गया है, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन ही मिल रहा है।
नैनपुर तहसील के कई गांवों में ऐसे किसान हैं जिनकी जमीन और दस्तावेज पूरी तरह सही हैं, इसके बावजूद उन्हें अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की एक भी किस्त नहीं मिली। किसान लगातार पटवारी और राजस्व कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही।
ग्राम परसवाड़ा के किसान मनोज सिंह कुशवाह का कहना है कि उन्हें और उनके परिवार को करीब दो वर्षों से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ नहीं मिला, जबकि वे पूरी तरह पात्र हैं। उनका आरोप है कि राजस्व अमले की लापरवाही के कारण उनका नाम सूची में नहीं जोड़ा गया।
किसानों का कहना है कि जब सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक सहारा देने के लिए इस महत्वाकांक्षी योजना का प्रचार कर रही है, तो फिर पात्र किसानों तक इसका लाभ पहुंचाने में इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है? क्या कागजी उपलब्धियों के सहारे योजनाओं की सफलता का ढिंढोरा पीटा जा रहा है?
किसान मनोज सिंह कुशवाह ने प्रशासन से मांग की है कि नैनपुर तहसील में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से वंचित किसानों की तत्काल जांच कर सूची तैयार की जाए और राजस्व विभाग की लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पात्र किसानों को उनका हक मिल सके।