आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित जीवनशैली ने हमें कई बीमारियों के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। इनमें सबसे आम लेकिन सबसे खतरनाक समस्या है ब्लड प्रेशर। नेशनल हेल्थ मिशन के आंकड़ों के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण शुरुआत में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते लेकिन यह अंदर ही अंदर शरीर को खोखला कर देता है। यदि समय रहते इसे नियंत्रित न किया जाए तो यह हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसी जानलेवा स्थितियों का कारण बन सकता है।
क्यों खतरनाक है बीपी की अनदेखी
उच्च रक्तचाप धमनियों पर अत्यधिक दबाव डालता है जिससे वे समय के साथ कमजोर या सख्त हो जाती हैं। केवल दवाएं ही काफी नहीं हैं बल्कि जीवनशैली में बदलाव भी अनिवार्य हैं। वहीं लो ब्लड प्रेशर को धीमा जहर माना जाता है जो शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति को बाधित कर सकता है।
दवा और डॉक्टरी परामर्श
ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए सबसे जरूरी है समय पर दवा का सेवन। डॉक्टर द्वारा सुझाई गई डोज को कभी भी खुद से बंद न करें। दवाओं का नियमित सेवन रक्त के प्रवाह को संतुलित रखने में प्राथमिक भूमिका निभाता है।
नियमित मॉनिटरिंग है सुरक्षा चक्र
बीपी की स्थिति पर नजर रखने के लिए रोजाना जांच जरूरी है। सुबह और शाम डिजिटल मशीन या हेल्थ सेंटर पर ब्लड प्रेशर मापें। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन सी चीजें आपके बीपी को ट्रिगर कर रही हैं और आप डॉक्टर को सटीक जानकारी दे पाएंगे।
नमक के सेवन पर लगाएं लगाम
ज्यादा नमक हाई बीपी का सबसे बड़ा दुश्मन है। रोजाना 5 ग्राम (लगभग एक चम्मच) से ज्यादा नमक न खाएं। पैकेट बंद फूड, अचार, चिप्स और बाहर के जंक फूड से तौबा करें। नमक कम करने से रक्तचाप में तत्काल गिरावट देखी जा सकती है।
हाइड्रेटेड रहें और भरपूर पानी पिएं
पानी न केवल प्यास बुझाता है बल्कि शरीर से अतिरिक्त सोडियम को बाहर निकालने में भी मदद करता है। दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। डिहाइड्रेशन से खून गाढ़ा हो सकता है जिससे बीपी का स्तर प्रभावित होता है।
शारीरिक सक्रियता और व्यायाम
रोजाना 30-45 मिनट की ब्रिस्क वॉक, साइकिलिंग या योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। नियमित व्यायाम से वजन नियंत्रित रहता है और हृदय की कार्यक्षमता बढ़ती है जिससे ब्लड प्रेशर प्राकृतिक रूप से सामान्य बना रहता है।
इन बातों का भी रखें ख्याल
तनाव को कम करने के लिए ध्यान लगाएं, धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं और अपनी डाइट में ताजे फल और हरी सब्जियों को प्राथमिकता दें। जागरूकता ही इस बीमारी का सबसे बड़ा इलाज है।