जिम्मेदारों की नींद टूटी या मजबूरी में कार्रवाई?

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले में इन दिनों घरेलू गैस की कमी के चलते प्रशासन जाग कर अनधिकृत तरीक़े से घरेलू गैस का उपयोग ढाबा होटलों व अन्य जगहों पर व्यावसायिक करण करते हुए घरेलू गैस टंकी का दुरूपयोग करने वालो पर कार्यवाही जारी है।

जानकारी के अनुसार नारायणगंज में घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग पर हुई कार्रवाई भले ही प्रशासन की सक्रियता दिखा रही हो, लेकिन इससे बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है—आखिर प्रशासन और गैस एजेंसी धारक अब तक क्या कर रहे थे?

स्थानीय स्तर पर लंबे समय से होटल-ढाबों में घरेलू सिलेंडरों का खुलेआम व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा था। यह कोई छुपी हुई बात नहीं थी, बल्कि हर किसी की नजरों के सामने चल रहा खेल था। इसके बावजूद जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसी धारकों की चुप्पी कई सवालों को जन्म देती है।

कमी हुई तो जागा प्रशासन?

अब जब बाजार में गैस की किल्लत और उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ने लगी, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। इससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि—

क्या कार्रवाई सिर्फ तब ही होगी जब हालात बिगड़ जाएं?

अगर समय रहते नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई होती रहती, तो आज यह स्थिति ही पैदा नहीं होती।

एजेंसी की भूमिका भी सवालों के घेरे में

घरेलू गैस सिलेंडर आखिर बिना जानकारी के बड़े पैमाने पर व्यवसायिक उपयोग में कैसे पहुंच रहे थे?

क्या गैस एजेंसी धारकों को इसकी भनक नहीं थी, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही थी?

जनता पूछ रही जवाब

आज आम उपभोक्ता गैस के लिए परेशान है, बुकिंग के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि—

इस अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन है?

जरूरत सिर्फ कार्रवाई नहीं, सिस्टम सुधार की

एक-दो दिन की कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी। जरूरत है—

नियमित जांच

एजेंसी स्तर पर सख्त मॉनिटरिंग

दोषियों पर कड़ी और पारदर्शी कार्रवाई

ताकि भविष्य में फिर से ऐसा गैस का खेल न पनपे।

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