निर्माण शुरू करने के लिए काटे गए कई पेड़, डीपीआर के नाम पर भी खर्च हुई बड़ी राशि — नैनपुर से भोपाल तक चर्चा
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले की नगरपालिका परिषद नैनपुर द्वारा वार्ड क्रमांक 14 स्थित ग्राम उमरिया में प्रस्तावित नए बस स्टैंड के निर्माण को लेकर बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। वन विभाग की स्पष्ट आपत्ति के बावजूद नगर पालिका द्वारा निर्माण कार्य शुरू कराए जाने का मामला उजागर हुआ है। अब तहसीलदार नैनपुर ने आदेश जारी कर निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगा दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम उमरिया के खसरा नंबर 243/1 की कुल 8.043 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 0.80 हेक्टेयर क्षेत्र में मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना के तहत नए बस स्टैंड के निर्माण की योजना बनाई गई थी। इस संबंध में नगर पालिका द्वारा निविदा जारी कर निर्माण कार्य भी प्रारंभ करा दिया गया था। सूत्रों के अनुसार संबंधित ठेकेदार को अब तक करोड़ों रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है, जबकि निर्माण स्थल के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति स्पष्ट नहीं थी।
बताया जा रहा है कि इस परियोजना के लिए डीपीआर तैयार कराने के नाम पर भी नगर पालिका द्वारा बड़ी राशि खर्च की गई, जिससे परियोजना पर हुए कुल खर्च और उसकी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस भूमि को लेकर वन विभाग ने पहले ही आपत्ति दर्ज कर दी थी। वनमंडलाधिकारी पश्चिम सामान्य वन मंडल मंडला द्वारा नगर पालिका को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया था कि संबंधित भूमि “बड़े झाड़ का जंगल मद” की श्रेणी में आती है और वन अधिकार अधिनियम 2006 तथा वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 के प्रावधानों के तहत इस पर निर्माण कार्य की अनुमति नहीं दी जा सकती। वन विभाग ने यह भी कहा था कि बस स्टैंड निर्माण के लिए उक्त स्थान साइट स्पेसिफिक नहीं है और आवश्यकता होने पर अन्य उपयुक्त स्थल का चयन किया जा सकता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माण कार्य शुरू करने के लिए ठेकेदार द्वारा कई बड़े पेड़ों को काट दिया गया, जिससे वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचने की बात भी सामने आ रही है। यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि निर्माण की जल्दबाजी में पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी की गई।
इसके बावजूद नगर पालिका द्वारा निर्माण कार्य शुरू कराए जाने पर अब प्रशासन ने हस्तक्षेप किया है। तहसीलदार नैनपुर द्वारा 28 फरवरी 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि जब तक वन विभाग की अनुमति एवं भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। आदेश में वर्तमान में चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी कई सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जब वन विभाग पहले ही निर्माण की अनुमति देने से इनकार कर चुका था, तो नगर पालिका द्वारा किस आधार पर टेंडर जारी किया गया और ठेकेदार को करोड़ों रुपये का भुगतान कैसे किया गया। इससे सरकारी धन के उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि नगरपालिका नैनपुर के कार्य पूर्व में भी कई बार विवादों में रहे हैं और इस तरह के मामलों से यह आरोप लग रहे हैं कि जनता की मेहनत की कमाई से प्राप्त सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले की जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत आवेदन लगाने की तैयारी की जा रही है, ताकि टेंडर प्रक्रिया, भुगतान, डीपीआर और विभागीय अनुमतियों से जुड़े दस्तावेज सामने आ सकें।
वही प्रशासनिक हलकों में यह मामला अब नैनपुर से लेकर भोपाल तक चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज होने की संभावना जताई जा रही है।