खामोशी को मिली पहचान

*तकनीक और संवेदनशीलता ने साहिल को मिलाया उसके परिवार से

 

दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला/ कहते हैं कि जब प्रशासनिक दक्षता के साथ मानवीय संवेदनाएं जुड़ जाती हैं, तो असंभव भी संभव बन जाता है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण मंडला जिले में देखने को मिला, जहां लोक सेवा केंद्र, बाल गृह और जिला ई-गवर्नेंस टीम के संयुक्त प्रयासों ने एक मूक-बधिर बालक ‘साहिल’ को उसके परिवार से मिला दिया।

साहिल न बोल सकता था और न ही ठीक से सुन पाता था। भाषा की बाधा भी उसके लिए बड़ी चुनौती थी, क्योंकि उसे हिंदी का ज्ञान नहीं था। इस कारण वह अपनी पहचान या अपने घर का पता बताने में पूरी तरह असमर्थ था। सुरक्षा के मद्देनजर उसे मंडला के बाल गृह में रखा गया था, लेकिन उसकी पहचान एक पहेली बनी हुई थी।

इस बीच एक उम्मीद की किरण तब दिखाई दी, जब बालक ने गुजराती भाषा में कुछ धुंधले संकेत लिखे। इन्हीं संकेतों को आधार बनाकर लोक सेवा केंद्र और जिला ई-गवर्नेंस टीम ने तकनीकी जांच शुरू की। आधुनिक तकनीक और आधार डेटाबेस की मदद से आखिरकार उसकी पहचान वलसाड क्षेत्र के रूप में स्थापित हुई।

इसके बाद संबंधित परिजनों से संपर्क किया गया। सूचना मिलते ही साहिल की मां और बहन मंडला पहुंचीं। बाल कल्याण समिति और जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं और अंततः साहिल को सुरक्षित उसके परिवार को सौंप दिया गया।

यह पूरी घटना न सिर्फ प्रशासनिक दक्षता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि तकनीक और संवेदनशीलता का सही समन्वय किसी के जीवन में खुशियों की नई रोशनी ला सकता है।

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