समस्याओं के दलदल में फंसा मंडला जिला!

त्राहि-त्राहि कर रही जनता, शासन-प्रशासन बना मूकदर्शक

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला।मध्य प्रदेश का मंडला जिला इन दिनों समस्याओं के ऐसे जाल में उलझ गया है, जहां आम नागरिक त्राहि-त्राहि कर रहा है, लेकिन जिम्मेदार व्यवस्था मूकदर्शक बनी बैठी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, स्वच्छता, रोजगार और पंचायत व्यवस्था—लगभग हर क्षेत्र बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। हालात यह हैं कि जिले की समस्याओं की सूची इतनी लंबी है कि गिनाने बैठें तो खत्म होने का नाम नहीं लेती, लेकिन समाधान कहीं दिखाई नहीं देता।
चरमराई शिक्षा व्यवस्था
जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है। कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है और पढ़ाई की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर निजी स्कूलों की मनमानी पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। मध्यान्ह भोजन और सांझा चूल्हा योजना के भुगतान में देरी से समूह परेशान हैं, जिससे बच्चों के पोषण कार्यक्रम पर भी असर पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाएं भी बदहाल
स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, जबकि कई सरकारी डॉक्टर निजी क्लीनिकों में व्यस्त बताए जा रहे हैं। कई अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, जिससे मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अवैध कारोबार पर लगाम नहीं
जिले में अवैध कारोबार भी तेजी से फैलता नजर आ रहा है। सट्टा, जुआ, अवैध शराब, स्टोन क्रशर और खनिज संपदा के दोहन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। नर्मदा घाटों की हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है, लेकिन इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती।
पंचायत व्यवस्था में अव्यवस्था
ग्राम पंचायतों में भी अव्यवस्था का आलम है। कई पंचायत कार्यालय नियमित रूप से नहीं खुलते और कई कर्मचारी मुख्यालय से गायब रहते हैं। पंचायत की सामग्री तक निजी घरों में रखे होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में भी लापरवाही और अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं।
योजनाओं में दिखावा, जमीनी असर कम
प्रधानमंत्री आवास योजना, जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन और जनकल्याण शिविर जैसी योजनाओं में भी केवल औपचारिकता और कागजी कार्रवाई का आरोप लग रहा है। कई मामलों में आवेदन लंबित पड़े रहते हैं और समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता।
जनता ने उठाए सवाल
लगातार बढ़ती समस्याओं के बीच जिले की जनता अब सवाल पूछ रही है कि आखिर कब व्यवस्था सुधरेगी। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो लोगों का आक्रोश और बढ़ सकता है।

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