अप डाउन पर नहीं लग रहा ब्रेक… शासन प्रशासन पर संरक्षण का आरोप, मनमानी पर उतारू सरकारी तंत्र 

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में सरकारी व्यवस्था की जमीनी हकीकत लगातार सवालों के घेरे में है। हालात यह हैं कि जिन कर्मचारियों को गांवों में रहकर जनता को सेवाएं देना चाहिए, वही कर्मचारी मुख्यालय से नदारद होकर मनमानी कर रहे हैं। शिक्षक, पटवारी, एएनएम और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता सहित कई विभागों के कर्मचारी मुख्यालय में रहने की अनिवार्यता को नजरअंदाज कर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर समय-समय पर समाचार भी प्रकाशित हो रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

जानकारी के अनुसार मंडला जिले की कई ग्राम पंचायतों में सरकारी कर्मचारी मुख्यालय में निवास नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। सबसे ज्यादा शिकायतें जनपद पंचायत नैनपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायतों से सामने आ रही हैं, जहां शिक्षक, पटवारी और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी सप्ताह में कभी-कभार ही दिखाई देते हैं। कई जगहों पर तो स्कूलों में शिक्षक देर से पहुंचते हैं या फिर छुट्टी के समय ही नजर आते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है और सरकारी शिक्षा व्यवस्था की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

इसी तरह पटवारियों के मुख्यालय में नहीं रहने से राजस्व संबंधी कार्य भी ठप पड़ते नजर आ रहे हैं। जमीन संबंधी नामांतरण, सीमांकन और अन्य जरूरी कार्यों के लिए ग्रामीणों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी मुख्यालय में नहीं रहते और जरूरत पड़ने पर भी आसानी से उपलब्ध नहीं होते, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। कई उपस्वास्थ्य केंद्रों में एएनएम और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता मुख्यालय से दूर रहकर अपनी ड्यूटी निभा रही हैं। परिणामस्वरूप गर्भवती महिलाओं, बच्चों के टीकाकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहले ही सीमित हैं, ऐसे में कर्मचारियों की अनुपस्थिति हालात को और गंभीर बना रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अधिकारी और कर्मचारी मुख्यालय में निवास नहीं करेंगे तो ग्रामीणों को समय पर सेवाएं कैसे मिलेंगी। सरकारी नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारी अपने मुख्यालय में निवास करेंगे ताकि जनता को तुरंत सुविधा मिल सके, लेकिन मंडला जिले में इस नियम का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

वही ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मुख्यालय में नहीं रहने वाले शिक्षक, पटवारी, एएनएम और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे अपने-अपने कर्मचारियों की उपस्थिति और निवास व्यवस्था की नियमित जांच करें।

जनता की अपेक्षा है कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या को हल्के में न लेते हुए तत्काल परिणामकारी कार्रवाई करे। यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुंचना और भी मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि आखिर कब इस मनमानी पर लगाम लगती

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