रेवांचल टाइम्स | नारायणगंज (मंडला) केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना, जिसका उद्देश्य “हर घर जल” के तहत ग्रामीणों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है, अब नारायणगंज क्षेत्र में गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है।
जनपद पंचायत नारायणगंज की ग्राम पंचायत शाहा के पोषक ग्राम सिंघनपुरी में चल रहे पाइपलाइन निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने इस कार्य में लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जिसमें लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है।
पुरानी पाइपलाइन हटाकर नई बिछाने पर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2022-23 में बिछाई गई पाइपलाइन को अब उखाड़कर पुनः नई पाइपलाइन डाली जा रही है, और दोनों बार कार्य एक ही ठेकेदार द्वारा किया गया है। इससे कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं—
क्या पहले किया गया कार्य गुणवत्ता विहीन था? यदि हां, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
और यदि कार्य सही था, तो उसे हटाना क्या सरकारी धन की बर्बादी नहीं?
तकनीकी मानकों की अनदेखी
ग्रामीणों का आरोप है कि नई पाइपलाइन मात्र 1.5 से 2 फीट की गहराई में डाली जा रही है, जो निर्धारित तकनीकी मानकों के विपरीत है। विशेषज्ञों के अनुसार इतनी कम गहराई भविष्य में लीकेज, टूट-फूट और बार-बार मरम्मत जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल
इस पूरे मामले में केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि विभागीय अधिकारियों और इंजीनियरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निरीक्षण केवल कागजों में हो रहा है और जिम्मेदार अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
“शासन के पैसों की होली” – ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ गड्ढे खोदकर बजट खर्च दिखाया जा रहा है, जबकि उन्हें वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा। उनका कहना है कि यह योजना अब कुछ लोगों के लिए “कमाई का जरिया” बनती जा रही है।
संशोधन के नाम पर नया खेल?
सूत्रों के मुताबिक किसी संशोधन या नई स्वीकृति के नाम पर यह कार्य दोबारा शुरू किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पुरानी पाइपलाइन को हटाने का तकनीकी कारण क्या था।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से सीधा सवाल किया है कि आखिर उन्हें शुद्ध पेयजल कब तक उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन की अग्नि परीक्षा
अब इस मामले में प्रशासन की भूमिका अहम हो गई है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो न केवल सरकारी धन की बर्बादी जारी रहेगी, बल्कि जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो सकती है।