बिना GST के फर्जी बिलों से लाखों का भुगतान! नगर परिषद डिंडौरी पर भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने खाली करने के गंभीर आरोप

दैनिक रेवांचल टाइम्स – डिंडौरी जिले की नगर परिषद डिंडौरी इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियों में है। परिषद पर आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, गबन और वित्तीय अनियमितताएं की जा रही हैं। जहा पर बिना GST के बिल, फिर भी धड़ल्ले से भुगतान किये जाने की जानकारी सामने आ रही है वही दूसरी और जिम्मेदार आँख मूंद का कुर्सी में अपनी जड़ें जमाये हुए है और जिला प्रशासन मूक दर्शक बनके सब देख रहा हैं।
वही सूत्रों के अनुसार नगर परिषद में ऐसे बिलों का भुगतान किया जा रहा है जिनमें— GST नंबर का उल्लेख नहीं है
फर्म का पूरा पता दर्ज नहीं है, अलग-अलग स्थानों (भोपाल, डिंडौरी, सक्का) के पते दर्शाए गए हैं, लेकिन सभी बिलों में बैंक विवरण एक ही है, यह स्थिति खुद में गंभीर संदेह पैदा करती है कि कहीं फर्जी फर्मों के जरिए भुगतान तो नहीं किया जा रहा।
बैंक ने भी जताई आपत्ति
जानकारी के मुताबिक जब इन बिलों के आधार पर भुगतान प्रक्रिया बैंक तक पहुंची, तो बैंक ने—
बिलों में अधूरी जानकारी पर आपत्ति जताई स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना GST और पूर्ण पते वाले बिलों का भुगतान नियमों के विरुद्ध है
“रोशनी ट्रेडर्स” को भुगतान पर सवाल
सूत्र बताते हैं कि “रोशनी ट्रेडर्स” नामक फर्म को— कुल ₹2,41,904/- का भुगतान किया गया, विभिन्न पतों वाले बिलों के माध्यम से भुगतान हुआ जबकि सभी बिलों में बैंक अकाउंट एक ही पाया गया भुगतान पर फर्जीवाड़े के संकेत बिलों पर GST नहीं फर्म का भौतिक अस्तित्व संदिग्ध, नोटशीट, SAP वाउचर संलग्न होने के बावजूद प्रक्रिया पर सवाल
नियमों को दरकिनार कर भुगतान स्वीकृत
इन तथ्यों के आधार पर स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यह पूरा मामला फर्जी बिलों के जरिए सरकारी राशि निकालने का हो सकता है।
परिषद पर उठ रहे सवाल
बिना GST वाले बिल कैसे पास हुए?
एक ही बैंक खाते से अलग-अलग फर्मों के बिल क्यों? क्या अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है भुगतान? क्या वास्तविक कार्य हुए भी हैं या सिर्फ कागजों में?
स्थानीय जनता की मांग
स्थानीय नागरिकों और जागरूक लोगों ने मांग की है कि—
पूरे मामले की वित्तीय और तकनीकी जांच कराई जाए, संबंधित अधिकारियों और फर्मों की जिम्मेदारी तय हो
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो
वही नगर परिषद डिंडौरी में सामने आ रहे ये आरोप न सिर्फ वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो विकास योजनाओं के नाम पर जनता के पैसों की लूट जारी रह सकती है।

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