मंडला में उत्तरवाहिनी माँ नर्मदा परिक्रमा का भव्य आयोजन, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया भाग

रेवांचल टाइम्स मंडला मध्यप्रदेश के मंडला जिले में पवित्र माँ नर्मदा की उत्तरवाहिनी परिक्रमा का आयोजन श्रद्धा, आस्था और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस विशेष परिक्रमा का शुभारंभ नगर स्थित प्रसिद्ध व्यास नारायण मंदिर से संकल्प लेकर किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंडला में बहने वाली माँ नर्मदा की धारा उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित होती है, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, उत्तरवाहिनी नर्मदा की परिक्रमा सम्पूर्ण नर्मदा परिक्रमा के समान फलदायी मानी जाती है। विशेष रूप से चैत्र मास में इस परिक्रमा को करने से मोक्ष की प्राप्ति तथा बैकुंठ धाम जाने का मार्ग प्रशस्त होता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस पवित्र यात्रा से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
परिक्रमा यात्रा का प्रारंभ व्यास नारायण मंदिर में विधिवत पूजा अर्चना और संकल्प के साथ हुआ। इसके पश्चात श्रद्धालु नर्मदा तट के मार्ग पर आगे बढ़े। यात्रा के दौरान पहला प्रमुख पड़ाव महाराजपुर त्रिवेणी संगम रहा, जहां श्रद्धालुओं ने स्नान कर पुण्य अर्जित किया और तट परिवर्तन की परंपरा निभाई। इसके बाद यात्रा मंगलेश्वर मंदिर, कारिकोंन क्षेत्र होते हुए आगे बढ़ी।
लगभग 25 किलोमीटर की इस पैदल यात्रा में श्रद्धालुओं ने घने प्राकृतिक वातावरण के बीच भक्ति भाव से पदयात्रा की। यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव घाघा घाट रहा, जहां श्रद्धालुओं के रात्रि विश्राम और भोजन की समुचित व्यवस्था की गई थी। रास्ते में सिलपुरा में बालभोग एवं अल्प विश्राम का आयोजन किया गया, जिसकी व्यवस्था सूर्य कुंड धाम समिति द्वारा की गई थी।
पूरे मार्ग में विभिन्न स्थानों पर स्थानीय नागरिकों, धार्मिक संगठनों और आश्रमों द्वारा तीर्थयात्रियों के लिए स्वल्पाहार एवं पेयजल की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई। यह सहयोग और सेवा भावना इस धार्मिक आयोजन की विशेषता रही। श्रद्धालुओं ने सेवा कार्य में लगे लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया और इसे भारतीय संस्कृति की जीवंत मिसाल बताया।
घाघा घाट पर रात्रि विश्राम के दौरान भव्य माँ नर्मदा आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रातभर भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। इस दौरान संत-महात्माओं ने नर्मदा महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म और आस्था के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
दूसरे दिन प्रातःकाल श्रद्धालुओं ने घाघी घाट से नाव द्वारा तट परिवर्तन किया और आगे की यात्रा प्रारंभ की। इसके पश्चात यात्रा बबैहा और ग्वारी मार्ग से होते हुए पुनः मंडला की ओर अग्रसर हुई। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए धर्मप्रेमियों द्वारा स्वल्पाहार और पेयजल की व्यवस्था की गई, जिससे यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
इस भव्य परिक्रमा में केवल मंडला जिले ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु शामिल हुए। विशेष रूप से मुंबई, पुणे, नासिक, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट तथा गोंदिया सहित अन्य जिलों और राज्यों से आए भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
श्रद्धालुओं का कहना है कि माँ नर्मदा की इस उत्तरवाहिनी परिक्रमा में शामिल होना उनके जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान उन्हें अद्भुत शांति और आत्मिक संतोष की अनुभूति हुई। कई श्रद्धालुओं ने इसे अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति का माध्यम भी बताया।
प्रशासन और स्थानीय समितियों द्वारा इस आयोजन को सफल बनाने के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे। सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम लगातार सक्रिय रही।
कुल मिलाकर, मंडला में आयोजित उत्तरवाहिनी माँ नर्मदा परिक्रमा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा भावना और सांस्कृतिक एकता का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। श्रद्धालुओं के उत्साह और आयोजकों के समर्पण ने इस आयोजन को भव्य और सफल बना दिया, जिससे यह परिक्रमा आने वाले वर्षों में और भी व्यापक स्वरूप धारण कर सकती है।

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