शराबबंदी का फैसला ठंडे बस्ते में? बंद के बाद भी मंडला में 150–200 बेनामी दुकानें संचालित!

 

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडलामंडला नगर और उपनगरीय क्षेत्रों में शराबबंदी को लेकर लिया गया फैसला अब सवालों के घेरे में है। तत्कालीन शिवराज सरकार द्वारा पवित्र नगरी की पहचान को ध्यान में रखते हुए नगर और आसपास के क्षेत्रों में शराब दुकानों को बंद किया गया था। लेकिन आज हकीकत यह है कि उसी मंडला में बंद के बावजूद 150 से 200 तक बेनामी शराब दुकानें धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं।

सरकारी आदेश बेअसर, जमीनी हकीकत शर्मनाक

सरकार के आदेश कागजों तक सीमित रह गए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर शराब का कारोबार पहले से ज्यादा फैल चुका है। बस स्टैंड से लेकर मोहल्लों और गांवों तक खुलेआम शराब बिक रही है, मानो किसी को कानून का डर ही नहीं।

बेनामी दुकानों का साम्राज्य—किसके संरक्षण में? सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये दुकानें खुलेआम संचालित हो रही हैं, लेकिन न तो इन पर कोई सख्त कार्रवाई होती है और न ही इन्हें बंद कराने की गंभीर कोशिश दिखती है।

वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर और उपनगरीय क्षेत्र में किराना दुकान अंडे की दुकान और ढाबों सहित 150–200 बेनामी दुकानों का संचालन अपने आप में बड़ा सवाल है—आखिर यह सब किसके संरक्षण में चल रहा है?

ठेकेदारों का नेटवर्क और प्रशासन की चुप्पी

शराब ठेकेदारों ने गांव-गांव तक अपना नेटवर्क फैला लिया है। सप्लाई, बिक्री और वसूली का पूरा सिस्टम बिना किसी डर के चल रहा है। आबकारी विभाग और जिला प्रशासन की चुप्पी इस पूरे मामले में संदेह को और गहरा करती है।

नशे की गिरफ्त में जा रही नई पीढ़ी

आसान उपलब्धता के चलते युवा वर्ग तेजी से नशे की ओर बढ़ रहा है। जिस फैसले का उद्देश्य समाज को नशामुक्त बनाना था, वही आज मजाक बनकर रह गया है।

कार्रवाई सिर्फ कागजों और फोटो तक

कभी-कभार छोटी कार्रवाई कर फोटो जारी कर देना ही विभाग की सक्रियता मानी जा रही है। बड़े स्तर पर चल रहे इस अवैध नेटवर्क को छूने की हिम्मत तक नहीं दिखाई जाती।

जनता पूछ रही—फैसला लागू होगा या नहीं?

अब जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है—

क्या शिवराज सरकार का लिया गया फैसला सिर्फ दिखावा था?

क्या प्रशासन इस पर कोई ठोस कदम उठाएगा?

या फिर बेनामी दुकानों का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?

मंडला में शराबबंदी का सच—कागजों में बंद, जमीन पर चालू!

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