प्रधानमंत्री सड़क योजना में मेंटेनेंस के नाम पर भ्रष्टाचार का बड़ा खेल

सिर्फ पुताई और दिखावे तक सीमित मरम्मत, बिना जांच लाखों का भुगतान — मिलीभगत के आरोप

 

दैनिक रेवांचल टाइम्स – जिले में विभाग से गठबंधन कर ठेकेदार को फ़ायदा पहुँचाने में कोई कसर नही छोड़ रहे है जहाँ लोगो की जनकल्याणकारी योजना प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़कों के मेंटेनेंस कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। कागजों में मरम्मत पूरी दिखाई जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत में कार्य केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।

 

दिखावे की मरम्मत, असल में खानापूर्ति

 

ग्रामीण सड़कों पर सिर्फ ऊपर-ऊपर पुताई और पैचवर्क कर काम पूरा दिखा दिया जाता है। गड्ढों की सही मरम्मत नहीं हो रही और कुछ ही समय में सड़क फिर से खराब स्थिति में पहुंच जाती है।

 

मेंटेनेंस के नाम पर जरूरी कार्य गायब

 

नियमों के अनुसार जिन कार्यों का संधारण होना चाहिए, वे जमीनी स्तर पर नजर ही नहीं आ रहे:

 

पुल-पुलियों का संधारण नहीं किया जा रहा

 

रेन कट (कटाव) का सुधार नहीं हो रहा

 

झरिया (ड्रेनेज) की सफाई नहीं की जा रही

 

रोड साइड शोल्डर की मरम्मत नहीं हो रही

 

गड्ढों को ठीक से भरा नहीं जा रहा

 

इसके बावजूद कागजों में कार्य पूर्ण दर्शाकर भुगतान निकाल लिया जा रहा है।

 

बिना जांच हो रहा भुगतान

 

सूत्रों के अनुसार विभाग के जिम्मेदार कर्मचारी बिना स्थल निरीक्षण और गुणवत्ता जांच के ही ठेकेदारों को लाखों रुपए का भुगतान कर रहे हैं। इससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं

 

स्थानीय लोगों द्वारा कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। इससे यह आशंका और गहरी हो रही है कि पूरा मामला विभागीय मिलीभगत से संचालित हो रहा है।

 

परसेंटेज का खेल चर्चा में

 

विभागीय सूत्रों के अनुसार इन कार्यों में “परसेंटेज” का खेल भी चल रहा है, जिसके चलते बिना गुणवत्ता जांच के ही फाइलों में कार्य पूर्ण दिखाकर राशि आहरित कर ली जाती है।

 

जनता भुगत रही खामियाजा

 

इन लापरवाहियों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। खराब सड़कों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है और लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है।

 

वही प्रधानमंत्री सड़क योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क सुविधा देना है, लेकिन यदि मेंटेनेंस के नाम पर इसी तरह भ्रष्टाचार चलता रहा, तो योजना का उद्देश्य अधूरा ही रह जाएगा। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर कब तक मौन रहते हैं और कब ठोस कार्रवाई होती है।

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