रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
जितेन्द्र अलबेला
बैतूल कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी अपनी त्वरित कार्यशैली और संवेदनशीलता के लिए पहचाने जाते हैं, लेकिन गुरुवार की अलसुबह उन्होंने जो किया, उसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। जब पूरा शहर गहरी नींद में था, तब एक गंभीर मरीज की जान बचाने के लिए जिले का मुखिया सुबह 4:45 बजे खुद अस्पताल की दहलीज पर खड़ा था।
बडोरा निवासी 67 वर्षीय आरसी कुंभारे को सीने में बेचैनी और भारीपन की शिकायत के बाद 27 मार्च की रात जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। सुबह करीब 4 बजे डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें मेडिकल कॉलेज भोपाल रेफर कर दिया। मरीज के बेटे योगेश कुंभारे ने एंबुलेंस (108) के लिए काफी भाग-दौड़ की और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन जब कहीं से मदद नहीं मिली, तो उन्होंने सीधे कलेक्टर को फोन लगा दिया।
10 मिनट में ‘ऑन द स्पॉट’ एक्शन
योगेश ने बताया, “मैंने अखबारों में पढ़ा था कि कलेक्टर साहब जायज बात पर तुरंत एक्शन लेते हैं, इसलिए मैंने बेधड़क फोन लगा दिया।” फोन कटने के ठीक 10 मिनट बाद, यानी सुबह 4:45 बजे कलेक्टर सूर्यवंशी जिला अस्पताल पहुंच गए। कलेक्टर के अचानक आगमन की खबर मिलते ही अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। जो अधिकारी फोन नहीं उठा रहे थे, वे 10 मिनट के भीतर ‘जी साहब-जी साहब’ करते हुए मौके पर हाजिर हो गए।
नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर बैतूल
मरीज की जान से बढ़कर कुछ नहीं है। यदि सिस्टम में कहीं लापरवाही होती है, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मरीज को मिला जीवनदान
कलेक्टर के कड़े तेवर देखते ही तत्काल 108 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई और मरीज को सुरक्षित भोपाल रवाना किया गया। इस घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर कलेक्टर की जमकर तारीफ हो रही है। लोग कह रहे हैं कि यदि प्रदेश के हर संभाग और जिले में ऐसे ही संवेदनशील अधिकारी हों, तो मध्य प्रदेश का गौरव और बढ़ जाएगा।