राजनैतिक व्यंग्य-समागम
*
प्रिय भारत,
मैं रुपया हूं। मैं ठीक हूं। थोड़ी हरारत-सी हो जाती है। बुख़ार तो चढ़ता जा रहा है, लेकिन कमज़ोरी नहीं है। एक डॉलर जब भी सामने आता है, मेरी कंपकंपी बढ़ जाती है। और कोई ख़ास बात नहीं है। मैंने डोलो ले लिया है। डोलो लेने के बाद डॉलर के सामने थोड़ा तन जाता हूं, डोलो का असर कम होता है, थोड़ा लचक जाता हूं।
कभी नहीं सोचा था कि एक डॉलर के सामने मेरा मोल 95 तक चला जाएगा। मैं कमज़ोर कहा जाऊंगा। मेरी कमज़ोरी के नाम पर एक मज़बूत सरकार आई, जो हर दिन मज़बूत होती चली गई और मैं कमज़ोर होता गया। तब तो मैं एक डॉलर के सामने 62 रुपया था, आज 95 हो गया हूं। मेरी कमज़ोरी की आप चिंता मत कीजिए। मैं रुपया हूं। इसमें मेरा दोष नहीं है। दोष आप लोगों का है। आप डॉलर कमा नहीं सके, आप डॉलर बचा नहीं सके, आप डॉलर फंसा नहीं सके।
जितना डॉलर आता है, उतना बाहर चला जाता है। डॉलर को जाने से नहीं रोक पाने वाली सरकार के कारण मैं कमज़ोर हो जाता हूं। विदेशी निवेशक अपना पैसा लेकर गए हैं, आपका नहीं लेकर गए। जब भी अपना पैसा लेकर जाते हैं, मुझे कमज़ोर कर जाते हैं। मेरी कमज़ोरी की आप चिंता न करें। मेरी कमज़ोरी दूर करने के नाम पर मज़बूत होने वाली सरकार की चिंता करें।
यह सरकार इतनी मज़बूत हो गई कि 2016 में मुझे रातों-रात बंद कर दिया गया। नोटबंदी हो गई। मुझे डॉलर से डर नहीं लगता है। मुझे 8 पीएम से डर लगता है। कब आठ बजते ही पीएम मुझे बंद कर दें। नोटबंदी के समय सपना दिखाया कि बिस्तरों में, दीवारों में जो काला धन गड़ा है, बाहर आ जाएगा। आया तो नहीं, मैं जब नोटबंदी के बाद बाहर आया तो खोया-खोया सा रहने लगा। सारे चंदे एक ही दिशा में जा रहे थे मैं सहमा-सहमा यह सब देखता रहा और डॉलर के सामने कभी लजाते हुए 92 होता रहा, तो कभी शर्माते हुए 95 होता रहा।
वित्त मंत्री मेरी डॉक्टर हैं। रिज़र्व बैंक के गवर्नर मेरे कार्डियो डॉक्टर हैं। जैसे ही मेरा कॉलेस्ट्रोल बढ़ता है, वो मार्केट में डॉलर को छोड़ देते हैं। ऐसा नहीं है कि मैं किसी काम का नहीं हूं। इस कमज़ोरी में भी मैं वोटर के खाते में पहुंचकर रिज़ल्ट निकाल देता हूं।
इस चुनाव में भी मैं 30,000 करोड़ बंटने वाला हूं। बस इतना ही बदला है। मुझे बांटकर वोट मिल जाता है। आप मुझे हमेशा डॉलर के मुकाबले मत देखो। देखना है तो मुझे चुनाव आयोग के मुकाबले देखो, लाभार्थी योजना के मुकाबले देखो, वोटर के मुकाबले देखो। मैं नहीं, मुझे पाकर वोट देने वाले लोग कमज़ोर हुए हैं। मैं ठीक हूं। अपनी चिंता करो, मेरी नहीं।
तुम्हारा,
*रुपया*
*(पत्रकारिता के लिए रामनाथ गोयनका तथा रमन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित रवीश कुमार वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं।)*
**********
*2. एक बार फिर पॉपा वॉर रुकवा देंगे! : राजेंद्र शर्मा*
भागवत जी ने एकदम सही कहा — भारत ही यह युद्ध रुकवा सकता है। यह युद्ध यानी ईरान और अमरीका-इस्राइल के बीच का युद्घ। वैसे भागवत जी ने भी विनम्रता से काम लिया और बाकी सारी दुनिया पर मोदी से युद्ध रुकवाने की मांग करने की जिम्मेदारी डाल दी। बोल दिया कि सारी दुनिया ऐसा कह रही है। वैसे भागवत जी का बड़प्पन है कि उन्होंने दुनिया के कहने को इतना महत्व दिया। वर्ना वह तो सीधे भी मोदी जी को युद्ध रुकवाने के लिए कह सकते थे, उनसे युद्ध रुकवाने की मांग कर सकते थे। मांग कर सकते थे, माने मोदी जी को परामर्श दे सकते थे। और परामर्श भी मोदी जी के घर जाकर, भोजन के उपरांत दे सकते थे, एकांत में। या मोदी जी को अपने घर नागपुर बुलाकर भी परामर्श दे सकते थे। पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह परामर्श दिया, बल्कि अपेक्षा जताई — मोदी जी ही यह युद्ध रुकवा सकते हैं।
वैसे भागवत जी की दूरदर्शिता भी माननी पड़ेगी। मोदी से युद्ध रुकवाने के लिए कहा जरूर, पर तुरंत रुकवाने के लिए नहीं कहा। तुरंत की छोडि़ए, कोई टाइमलाइन दी ही नहीं। मोदी जी पर है, अपनी सहूलियत से कभी भी युद्ध रुकवा देें। बस युद्ध रुकवा दें। यूक्रेन-रूस युद्ध के टैम पर, भारतीय छात्रों को निकालने के लिए युद्ध रुकवाने के लिए मोदी जी पर, इन छात्रों के माता-पिता ने जिस तरह का दबाव डाला था, वैसा दबाव डालने की गलती भागवत जी ने बिल्कुल नहीं की। बेशक, मोदी जी ने तुरंत रुकवाओ, अभी रुकवाओ के ध्यान बंटाने वाले शोर के बावजूद, वॉर तब भी रुकवायी थी। बल्कि देश के विदेश मंत्रालय तक को बताए बिना वॉर रुकवायी थी, तभी बेचारा विदेश मंत्रालय तो बाद तक इससे इंकार ही करता रह गया कि मोदी जी ने वॉर रुकवायी थी। लगता है कि मोदी जी ने बस देश के रक्षा मंत्री को बताया था कि वह वॉर रुकवा रहे हैं और उन्हीं ने बाद में देश को बताया कि मोदी जी ने वॉर रुकवा दी थी। यह दूसरी बात है कि, ‘‘वॉर रुकवा दी पॉपॉ’’ वाली हीरोइन का वीडियो, उससे पहले ही सारी दुनिया को खबर दे चुका था — ‘‘मोदी जी ने वॉर रुकवा दी, पॉपॉ’’!
वैसे भागवत जी का मोदी जी को वॉर रुकवाने का सार्वजनिक रूप से परामर्श देना भी एक तरह का मास्टर स्ट्रोक ही हुआ। सिर्फ मोदी जी के वॉर रुकवाने से वह संदेश शायद नहीं जाता, जो भागवत जी के कहने पर मोदी जी के वॉर रुकवाने से जाएगा। इस संदेश से आरएसएस को हिंदूवादी कम और मुस्लिम-विरोधी, ईसाई-विरोधी और कम्युनिस्ट-विरोधी ज्यादा मानने वालों के मुंह तो एकदम सिल ही जाएंगे। सिर्फ भारत का प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि आरएसएस का स्वयंसेवक, अपने सरसंघचालक के परामर्श से वॉर रुकवा रहा होगा। और वॉर भी ऐसी, जिसका हिंदुओं से कुछ लेना-देना ही नहीं है, सिवाय रसोई गैस और तेल के दाम के। मुसलमान ईरान पर, ईसाई अमरीका और यहूदी इस्राइल का हमला! अगर भगवत-मोदी का हिंदुत्व इन दोनों के खिलाफ होता, तो भागवत जी मोदी जी को वॉर रुकवाने के लिए कहते क्या? युद्घ को, जब तक चलता, चलने नहीं देेते क्या? बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुच्चेरी के मुसलमान क्या अब भी यह बात नहीं समझेंगे कि जो मोदी जी मुसलमानों और ईसाइयों-यहूदियों के बीच युद्ध रुकवा सकते हैं, उनके खिलाफ हिंदुत्ववादी युद्ध रुकवाने के लिए कितने जरूरी हैं।
और सौ बातों की एक बात, यूक्रेन युद्ध में यह साबित हो चुका है कि वॉर तो पॉपॉ ही रुकवाएंगे! हमारे भक्तों के पास पॉपॉ हैं — मोदी जी। सो वॉर तो मोदी जी ही रुकवाएंगे। बस एक ही डर था। कहीं अगले शांति के नोबेल के चक्कर में ट्रंपवा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर’’ की तरह, यह वॉर रुकवाने का भी दावा करने नहीं आ जाए। पर ये पाकिस्तान वॉर रुकवाने कहां से आ गया! ट्रंप जी आप यह ठीक नहीं कर रहे हैं। वॉर रुकवाने का काम तो पॉपॉ का है, इसका ताज किसी भी ऐरे-गैरे के सिर पर कैसे रखे दे रहे हैं।
*(व्यंग्यकार वरिष्ठ पत्रकार और साप्ताहिक पत्रिका ‘लोकलहर’ के संपादक हैं।)*