हाईकोर्ट का सख्त संदेश….सूचना का अधिकार कोई एहसान नहीं, आम जनता का संवैधानिक हक

 

दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर:- मध्यप्रदेश माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर ने सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर एक 03 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि पारदर्शिता से समझौता किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। “डॉ. जयश्री दुबे बनाम केंद्रीय सूचना आयोग एवं अन्य” मामले में कोर्ट ने न केवल सूचना देने के अधिकार को मजबूत किया, बल्कि RTI को कमजोर करने वाले अधिकारियों को भी करारा संदेश दिया है।

*क्या है पूरा मामला?*

डॉ. जयश्री दुबे द्वारा एक RTI आवेदन के माध्यम से सरकारी नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे। लेकिन केंद्रीय सूचना आयोग ने धारा *8(1)(h)*, *8(1)(j)* और *11* का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया था।
इस पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए आयोग के फैसले को गलत ठहराया और पारदर्शिता के पक्ष में बड़ा निर्णय सुनाया।

*फैसले की मुख्य बातें*

*1. नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज अब सार्वजनिक सूचना*
उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक पद पर कार्यरत है, तो उसकी शैक्षणिक योग्यता, अनुभव प्रमाणपत्र, चयन प्रक्रिया और नियुक्ति आदेश जैसी जानकारी “निजी” नहीं मानी जाएगी।
ऐसी सभी सूचनाएं RTI के तहत मांगी जा सकती हैं।

*2. नहीं चलेगा अब गोपनीयता का बहाना*
माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि बिना ठोस कारण बताए सूचना रोकना (RTI) कानून का दुरुपयोग है।

*3. जनहित सर्वोपरि*
अगर किसी नियुक्ति में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की आशंका है, तो जनता को पूरी जानकारी पाने का अधिकार है और ऐसे गलत लोगों की जानकारी देना सक्षम प्राधिकारी का कर्तव्य भी।

*4. तीसरे पक्ष की सहमति जरूरी नहीं*
कोर्ट ने धारा 11 की गलत व्याख्या पर रोक लगाते हुए कहा कि:
यदि सूचना जनहित में है और किसी तीसरे पक्ष को नुकसान नहीं होता, तो उसकी अनुमति आवश्यक नहीं है।

*5. गलत तरीके से RTI खारिज करने पर जुर्माना*
कोर्ट ने पाया कि RTI जानबूझकर खारिज की गई थी।
संबंधित जन सूचना अधिकारी पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया गया, जो आवेदक को दिया जाएगा।

*6. 15 दिन में मुफ्त सूचना देने का आदेश*
अदालत ने निर्देश दिया कि मांगी गई सभी सूचनाएं 15 दिनों के भीतर निशुल्क उपलब्ध कराई जाएं।

*बड़ा संदेश*

यह फैसला उन लाखों नागरिकों के लिए उम्मीद की किरण है, जो सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही चाहते हैं।
हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि *(RTI) सूचना का अधिकार कानून* को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

*सूचना का अधिकार (RTI)*

केवल एक कानून नहीं, बल्कि लोकतंत्र व्यवस्था में यह आमजनता की ताकत भी है। यह फैसला हर नागरिक को यह भरोसा दिलाता है कि अगर वह सही सवाल पूछता है, तो उसका सही जवाब मिलना न्यायिक अधिकार है, न कि किसी की कृपा।

*“आपका RTI, आपकी ताकत”*

अब यह केवल एक बस नारा नहीं, बल्कि न्यायालय द्वारा प्रमाणित सच्चाई बन चुका है।

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