दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला।नगर के विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाला प्रशासन आज जमीनी हकीकत में पूरी तरह बेनकाब होता नजर आ रहा है। नगर के प्रमुख स्थलों—महापुरुषों के स्मारकों और वर्षों पुराने सुपर मार्केट स्थित फव्वारे—की हालत बद से बदतर हो चुकी है। जो स्थान कभी शहर की पहचान और गौरव हुआ करते थे, आज वे गंदगी, अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता के प्रतीक बन गए हैं।
सुपर मार्केट परिसर में स्थित फव्वारा, जो कभी नगर की सुंदरता का केंद्र था, आज कचरे और गंदगी से पटा पड़ा है। चारों ओर फल-सब्जी विक्रेताओं और दुकानदारों द्वारा खुलेआम अतिक्रमण कर लिया गया है। न तो सफाई की कोई व्यवस्था दिखती है और न ही किसी प्रकार की निगरानी। हालात यह हैं कि आम नागरिकों का आवागमन तक बाधित हो रहा है।
इसी तरह महापुरुषों के स्मारकों की स्थिति भी चिंताजनक है। जहां सम्मान और स्वच्छता होनी चाहिए, वहां गंदगी और अव्यवस्था का आलम है। यह न केवल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि समाज के लिए भी एक शर्मनाक स्थिति है कि जिन महान विभूतियों के नाम पर हम गर्व करते हैं, उनके स्मारकों की ऐसी दुर्दशा हो रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिले के जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि कहां हैं? क्या उन्हें यह बदहाल स्थिति दिखाई नहीं देती, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद रखी हैं?
नगर में हर ओर अतिक्रमण फैलता जा रहा है, जिससे सड़कें संकरी हो रही हैं और यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।
क्या यही है विकास?
जहां शहर की पहचान ही गंदगी और अव्यवस्था में बदल जाए, वहां विकास के दावे खोखले नजर आते हैं।
अब समय आ गया है कि प्रशासन जागे, अतिक्रमण हटाने के लिए सख्त कार्रवाई करे, नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करे और शहर की गरिमा को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए। अन्यथा जनता का आक्रोश किसी भी समय उफान पर आ सकता है।