सावन में शिवलिंग का भस्माभिषेक करने का क्या होता है महत्व, जानिए इसके नियम

सावन का महीना चल रहा है इस पावन महीने में दो सावन सोमवार भी पूरे हो चुके है जहां पर दो सोमवार बाकी है। शिवभक्तों के लिए सावन का महीना अपने आराध्य भगवान शिव को पूजने के लिए बेहद खास होता है। कहते हैं कि, सावन सोमवार के मौके पर अगर आप नियमों के साथ भगवान शिव की पूजा करते है तो आपकी सारी मनोकामनाएं शिवजी पूरा करते है।

कई लोग धार्मिक ग्रंथों में जानते है कि, भगवान शिव का अभिषेक, जल, पंचामृत के अलावा भस्म से भी किया जाता है। जहां पर भगवान शिव को अपने शरीर पर भस्म लगाना पसंद होता है। वहीं पर देवी-देवताओं को आभूषण और वस्त्र धारण करते है। चलिए जानते हैं भस्म और भस्माभिषेक के बारे में…

जानिए भस्म का असली अर्थ

यहां पर धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भस्म को नश्वरता का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि, भस्म इस बात का प्रतीक होता है कि, जन्म से मृत्यु के बाद हमें वैसे ही राख ही हो जाना है। इस तरह ही भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म लगाकर इस बात का संकेत देते है कि, संसार में कोई भी चीज स्थायी नहीं है, एक ना एक दिन सभी बातों का अंत हो जाना है। यहां पर भस्म को परम सत्य का सूचक भी माना गया है। सावन के सोमवार के दिन भस्म से भगवान शिव को अभिषेक करने से फायदा मिलता है और इसके सफल परिणाम भी होते है।

जानिए शिवलिंग का भस्माभिषेक करने के नियम

यहां पर सोमवार के दिन भस्माभिषेक करने के नियम होते है। कहा जाता है कि, भगवान शिव को भस्म काफी प्रिय लगती है जहां पर भस्म से अगर आप शिवलिंग का अभिषेक करते है तो आपके सारे कष्ट भगवान शिव निवारण करते है। यहां पर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि, शिवलिंग पर भस्म अर्पित करने से मोह-माया के जाल से भी व्यक्ति को मुक्ति मिलती है। जो लोग आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ना चाहते हैं उन्हें शिवलिंग का भस्म से अभिषेक करने पर अलौकिक अनुभव प्राप्त हो सकते हैं। वहीं भस्म से शिवलिंग का अभिषेक करने से नकारात्मक शक्तियों का विनाश होता है आप शांति के माहौल में रहते है।

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