रामाकांत सतनामी: ज़मीन का लुटेरा, इंसानों के सपनों का जालसाज़।
फर्जी दस्तावेज़, नकली मुहर, और करोड़ों का खेल …. यही है सतनामी का असली चेहरा।
मृतकों की पहचान बेचने वाला, पुश्तैनी ज़मीनों का अपहरणकर्ता।
सज़ा और FIR की परवाह न करने वाला, ज़मीन घोटालों का मास्टरमाइंड।
जबलपुर की अदालत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि हमारी ज़मीनें सिर्फ़ खेत या घर की नींव नहीं हैं, बल्कि धोखाधड़ी का सबसे आसान ज़रिया भी हैं। अदालत ने आदेश दिया है कि रामाकांत सतनामी, कृष्ण कुमार बर्मन, वीरन लाल बर्मन और उनके साथियों पर FIR दर्ज की जाए। आदेश साफ़ है …. 27 सितम्बर तक रिपोर्ट अदालत के सामने हो।
यह वही रामाकांत सतनामी है, जिसका नाम पिछले एक दशक से लगातार पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज होता आ रहा है।
रामाकांत सतनामी: ज़मीन घोटालों का आदतन अपराधी
रामाकांत का आपराधिक सफर 2013 से शुरू होता है। विजय नगर थाना में एफआईआर 32/2013 दर्ज हुई थी, जिसमें ज़मीन जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप थे।
वर्ष 2023 में अदालत ने उसे 12 साल का कठोर कारावास सुनाया। आरोप साबित हुए कि उसने ….
- नकली भू-अधिकार पुस्तिकाएँ बनाईं,
- तहसील की जाली मुहर और पटवारी के फर्जी हस्ताक्षर किए,
- नकली अनुबंध तैयार किए,
- और मृत या ग़ैर-मौजूद लोगों के नाम पर ज़मीनें बेच दीं।
धारा 420, 468, 470, 471 और 120-बी के तहत वह दोषी ठहराया गया।
लेकिन यह सज़ा भी उसे नहीं रोक पाई। 2025 में उसके खिलाफ नए मामले दर्ज हुए।
- ग्वारीघाट थाना …. एफआईआर 23/2025
आरोप: चेक प्रतिरूपण, जाली विक्रय विलेख।
पुलिस ने ₹5,000 का इनाम घोषित किया। - गोहलपुर थाना …. एफआईआर 75/2025
आरोप: धोखाधड़ी, जालसाजी, ब्लैकमेलिंग और उगाही।
यहां भी ₹5,000 का इनाम घोषित।
लगातार दर्ज होते मामले और इनामी घोषणाएँ यह साबित करते हैं कि रामाकांत सतनामी अब सिर्फ़ एक आरोपी नहीं, बल्कि आदतन अपराधी बन चुका है।
अदालत का आदेश और पुलिस की सुस्ती
प्रखर पाठक के परिवार ने जब शिकायत दर्ज कराई तो पुलिस की जांच धीमी पड़ गई। नतीजा यह हुआ कि अदालत को दखल देना पड़ा और थाना बरगी पुलिस को सख़्त निर्देश दिए गए कि तुरंत एफआईआर दर्ज करें।
अदालत ने साफ़ कहा …. यह कोई साधारण फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र है। मृत या अनुपस्थित ज़मीन मालिकों का प्रतिरूपण किया गया, पहले से बेची गई ज़मीनें दोबारा बेची गईं और करोड़ों का खेल चला।
बड़ा सवाल
रामाकांत सतनामी का नेटवर्क वर्षों से सक्रिय है। सवाल यह है कि इतनी शिकायतों और सज़ाओं के बावजूद यह तंत्र चलता कैसे रहता है? ज़मीन पंजीयन और राजस्व अभिलेखों की प्रणाली बार-बार क्यों धोखा खा जाती है? और जनता कब तक अपनी ही ज़मीनों पर किराएदार बनती रहेगी?
यह मामला सिर्फ़ अदालत के आदेश तक सीमित नहीं है। यह उस व्यवस्था पर उंगली उठाता है, जहाँ ज़मीनें बिकती हैं, फर्जी दस्तावेज़ बनते हैं और लोग अदालत-कचहरी के चक्कर काटते हैं।
रामाकांत सतनामी पर इनाम घोषित है, पर असली इनाम तो तब होगा जब ज़मीन पंजीयन प्रणाली सचमुच पारदर्शी बने और लोगों की पुश्तैनी ज़मीनें सुरक्षित रह सकें।
रामाकांत सतनामी: ज़मीन का लुटेरा, समाज का दुश्मन
रामाकांत सतनामी का नाम अब किसी सामान्य दलाल की तरह नहीं लिया जा सकता। यह वह शख़्स है जिसने ज़मीन के टुकड़े-टुकड़े करके सिर्फ़ खेत और घर नहीं, बल्कि इंसानों के सपने, उनकी मेहनत और उनका भरोसा तक बेच दिया।
एक आदतन अपराधी, जिसने जालसाजी को अपना पेशा बना लिया। वह नकली भू-अधिकार पुस्तिकाएँ गढ़ता है, तहसील और पटवारी की मुहरें चुराता है, मृतकों की पहचान बेचता है और ज़मीन पर कब्ज़ा जमाकर करोड़ों का खेल करता है।
सिर्फ़ अदालत ही नहीं, पुलिस रिकॉर्ड भी उसकी करतूतों से भरे पड़े हैं। 2013 में पहला मामला दर्ज हुआ, 2023 में 12 साल की कठोर सज़ा हुई, फिर भी 2025 आते-आते वह नए-नए घोटालों में डूबा मिला। ग्वारीघाट और गोहलपुर थानों में ताज़ा एफआईआर, और दोनों में उस पर इनाम घोषित।
क्या यह कोई आदमी है या ज़मीन का भूत, जो हर बार सज़ा और शिकायतों के बावजूद नए रूप में लौट आता है?
रामाकांत सतनामी सिर्फ़ एक अपराधी नहीं है, वह उस नालायक व्यवस्था का प्रतीक है जो अपराधियों को बार-बार पनपने देती है। पुलिस, राजस्व और पंजीयन विभाग …. सबके सामने यह अपराधी खेल खेलता रहा और सब मूकदर्शक बने रहे।
जिस समाज में एक रामाकांत सतनामी बार-बार उठ खड़ा होता है, वहाँ लोगों को अपनी पुश्तैनी ज़मीन पर भी चैन की नींद नहीं मिल सकती। यह आदमी इंसानों से उनकी ज़मीन ही नहीं छीनता, बल्कि उनके भविष्य को भी गिरवी रख देता है।
रामाकांत सतनामी को सिर्फ़ जेल की सलाख़ों के पीछे नहीं, बल्कि उसी ज़मीन की मिट्टी में गाड़कर इतिहास में दफ़न करना चाहिए, ताकि उसकी तरह कोई और कभी इंसानों की ज़मीन और ज़िंदगी से खिलवाड़ करने की हिम्मत न करे।