रेवांचल टाइम्स – मंडला, जिले का मुख्य डाकघर इन दिनों अपनी खराब और लचर व्यवस्था ढुल मुल कार्यप्रणाली, सुस्त कर्मचारियों की लापरवाही और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के कारण आम जनता के लिए मुसीबत का केंद्र बन गया है। और मिनटों का होता है घंटों में नगर का मुख्य डाक विभाग में डाक रजिस्टर करने में लोग परेशान हो रहे है और कोई न सुनने वाला है और न सुधार करने वाला है जिम्मेदार है दिन व दिन हालात बत से बत्तर होते है रहे हैं। कभी जिस डाकघर को भरोसे और व्यवस्था का प्रतीक माना जाता था, वह अब जनता की नाराज़गी और निराशा का कारण बनता जा रहा है। बीते कुछ माहों से डाकघर में व्याप्त अव्यवस्था दूर होने का नाम नही ले रही है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या डाक विभाग की निगरानी एजेंसियां सो रही हैं या फिर वे जानबूझकर इन समस्याओं को अनदेखा कर रही हैं?
डाक विभाग के कांउटरो में ऐसे सुस्त ऑपरेट
वही डाक विभाग के कांउटर में जो आपरेट कार्य कर रहे है या तो वह काम नही जानते है या फिर विभाग उन्हें कार्य सीखने का मौका दे रहा है कि आप धीरे धीरे काम काज सीखें जो कर्मचारी कार्य सीख जाता है उसे उस कांउटर से हटा कर नया कार्य दिया जाता है, आये दिन कांउटर में वही दिखाइ पड़ते है जो काम मिनट का वह कार्य आधा से एक घण्टे तक मे हो रहा है और लम्बी लम्बी लाइनें देखने को मिल रही है या फिर डाक प्रबंधन उपभोक्ता काउंटर में ऐसे नो सिखियों को बिठाल कर केवल अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा है और इसका खामियाजा दूर दूर से अपने अपत्रो को रजिस्ट्री या स्पीट पोस्ट करने पोस्ट आफिस पहुँचते है तो उन्हे इनके कार्य केवल निराशा ही लगती है और इन काउंटरों में या कंप्यूटर में ज्ञान कमी या मन नही लगता या फिर सरकारी व्यवस्था का सुस्त रवैया इन्हें कोई मतलब नही है कि कौन कितनी दूर से आया है या फिर कोई अपना बहुमूल्य कार्य छोड़ कर पत्र की रजिस्ट्री करने आया है, जिला मुख्यालय के डाक घर मे जब यह व्यवस्था है तो दूर दराज की क्या स्थिति होगी यह आसानी से अनुमान लगाया जा सकता हैं जहाँ नगर के मुख्य डाकघर में वर्तमान में नव प्रशिक्षित कर्मचारियों को काम पर लगाया जा रहा है, जो कंप्यूटर संचालन में दक्ष नहीं हैं। इसका सीधा असर जनता पर पड़ रहा है। डाक रजिस्ट्री, मनीऑर्डर आधार कार्ड सुधार, और अन्य डाक सेवाओं के लिए लोगों को लंबी कतारों में घण्टो तक खड़ा रहना पड़ रहता है। कंप्यूटर में पारंगत न होने के कारण काम की गति बेहद धीमी है। हर कार्य में देरी हो रही है, और जो कार्य 5 से 10 मिनट में निपट सकता है, उसमें आधे से एक घंटे से ज़्यादा समय लग रहा है।
सर्वर डाउन और संसाधनों की कमी बहाने या सच्चाई
वही आये दिन मुख्य डाक घर में सर्वर डाउन रहने की शिकायतें आम हो चुकी हैं। या कहे जब मन न कहे या काम मे मन न लगे तो रटा रटाया जबाब सर्वर का बहाना बनाया जाता है तो कभी टिकट, पोस्टल ऑर्डर, रजिस्ट्री जैसी आवश्यक चीजें उपलब्ध नहीं रहतीं। वही दूसरी और आये दिन प्रिंटर भी बन्द हो जाते है जो लोग डाक भेजते है उन्हें रसीद न देकर उपभोक्ता को उनके मोबाईल से रशीद की कम्प्यूटर से फोटो दी जाती रही ये कैसा डिजिटल इंडिया है बड़ा सवाल हैं।
प्रशिक्षित कर्मचारी गैरहाजिर, नव प्रशिक्षु परेशान
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार डाकघर में नियुक्त प्रशिक्षित स्थायी कर्मचारी अक्सर अपनी ड्यूटी से गायब रहते हैं। वे ड्यूटी के समय यहां वहाँ या चाय-पान की दुकानों पर बैठे नजर आते हैं, जबकि डाकघर के भीतर कामकाज का सारा बोझ नव प्रशिक्षु कर्मचारियों पर डाल दिया गया है। इन नव प्रशिक्षुओं को न तो पूरे सिस्टम की समझ है, न ही वे पूरी तरह से कार्य में दक्ष हैं। इसका परिणाम यह होता है कि डाकघर में लंबी लम्बी लाइनें लग रही हैं और लोग घंटों खड़े रहने के बाद भी अपना काम नहीं करवा पाते।
समय पर काउंटर बंद, जनता को लौटना पड़ता है खाली हाथ
सबसे बड़ी समस्या यह है कि जैसे ही डाकघर का समय पूरा होता है, कर्मचारी बिना यह देखे कि कितने लोग अभी भी कतार में खड़े हैं, काउंटर बंद कर देते हैं। इन्हें लोगो की समस्या से कोई मतलब नही होता है वह केवल एक ग्राहक हो वह सरकारी मुलाजिम जो उन्हें केवल टाईम तो टाइम अपने तरीके से करना है लाइन रहे लोग खड़े रहे इन्हें कोई लेना देना नही न ही कोई हमदर्दी है कई बार लोगों को बिना काम करवाए वापस लौटना पड़ता है। खासकर दूर-दराज़ के गांवों से आने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और श्रमिक वर्ग के लोग, जो दिनभर की मजदूरी छोड़कर डाकघर आते हैं, उन्हें बेहद परेशानी उठानी पड़ती है।
वही जिले का यह मुख्य डाकघर है, जहां प्रतिदिन सैकड़ो लोगों का आना जाना होता है। ऐसे में यहां की अव्यवस्था केवल एक संस्था की विफलता नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की उदासीनता को दर्शाती है। समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया जाना, डाकघर एक ऐसा स्थान होता है, जहां आम आदमी की सबसे बुनियादी जरूरतें पूरी होती हैं—डाक भेजना, मनी ऑर्डर करना, बैंकिंग सेवाएं लेना, आदि। लेकिन जब यही सेवाएं लोगों की परेशानी का कारण बन जाएं, तो यह पूरे सिस्टम की विफलता का प्रतीक है। जनपेक्षा है कि डाकघर में फैली अव्यवस्था को जल्द से जल्द सुधार किया जाए और जनता की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाय जिससे डाक घर में आने वाले लोगो को अपना काम समय हो सकें।