कुम्भकर्ण वध की गाथा
मण्डल के अध्यक्ष अरविंद राजपूत ने बताया कि लक्ष्मण जी के चैतन्य होने की सूचना मिलने पर रावण ने अपने अनुज कुम्भकर्ण को छह मास की नींद से जगाया। कुम्भकर्ण ने रावण को नीति उपदेश देते हुए माता सीता को श्रीराम को लौटाने की सलाह दी, मगर रावण ने उसकी बात नहीं मानी और उसे युद्ध के लिए भेज दिया।
युद्ध के मैदान में कुम्भकर्ण ने रामदल को भयंकर क्षति पहुँचाई, जिसके बाद स्वयं भगवान श्रीराम युद्ध के लिए आए। श्रीराम और कुम्भकर्ण के बीच भीषण युद्ध हुआ और अंततः श्रीराम के हाथों कुम्भकर्ण का वध हुआ।
मेघनाद का पराक्रम और वध
मुख्य निर्देशक वीरेन्द्र शुक्ल ने जानकारी दी कि रावण के आदेश पर मेघनाद युद्ध के लिए जाने से पहले यज्ञ करने लगा। लक्ष्मण जी के नेतृत्व में वानर सेना ने उस यज्ञ को नष्ट कर दिया, जिसके बाद लक्ष्मण और मेघनाद के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया। मेघनाद ने अपने अद्वितीय पराक्रम का प्रदर्शन किया, लेकिन लक्ष्मण जी ने अपनी दृढ़ इच्छा, व्रत और वीरता के बल पर उसका वध कर दिया।
सती सुलोचना प्रसंग ने सबकी आँखें भर दीं
मेघनाद वध के बाद सती सुलोचना का अत्यंत मार्मिक प्रसंग मंचित हुआ। इसमें दिखाया गया कि मेघनाद की पत्नी सुलोचना अपने पति का शीश मांगने के लिए श्रीराम के दल में जाती हैं। इस करुणापूर्ण दृश्य ने सभी दर्शकों की आँखें नम कर दीं। श्रीराम ने सम्मान के साथ मेघनाद के शव को लंका को सौंप दिया।
कलाकारों का शानदार अभिनय
बारहवें दिन की लीला में श्री राम की भूमिका में रजत पांडे, लक्ष्मण के रूप में आयुष शुक्ला, हनुमान के तौर पर संतोष कुशवाह, रावण बने जितेंद्र सोनी, कुंभकर्ण के रोल में विजय आनंद दुबे, मेघनाद के किरदार में मयंक चौरसिया, विभीषण बने नीरज चौरसिया और सुग्रीव की भूमिका में श्रीकांत द्विवेदी ने अपने अभिनय से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।
दशहरा की भव्य तैयारी: 51 फीट का रावण दहन आज
प्रवक्ता ऋषभ स्थापक ने बताया कि आज की लीला में अहिरावण वध, अतिकाय वध एवं नारांतक वध की लीलाएँ खेली जाएँगी। इसके साथ ही, असत्य पर सत्य की जीत का महापर्व दशहरा भी आज ही मनाया जाएगा, जिसके लिए मंडल ने भव्य तैयारी की है।
भव्य शोभायात्रा और रावण दहन का समय
मंडल के संरक्षक राजू चारणागर एवं कस्तूरचंद जैन ने बताया कि श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण एवं हनुमान जी के साथ छोटी बाजार श्रीरामलीला रंगमंच से ठीक 3:00 बजे दशहरा मैदान के लिए प्रस्थान करेंगे। यह भव्य शोभायात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए शाम 05:00 बजे दशहरा मैदान पहुँचेगी।
मंडल संरक्षक सतीश दुबे लाला के अनुसार, 51 फीट ऊँचे रावण पुतले का दहन श्री रामचंद्र जी के द्वारा गोधूलि बेला यानी ठीक 6:30 बजे किया जाएगा। इसके बाद राहुल द्विवेदी के निर्देशन में इलेक्ट्रॉनिक आतिशबाजी का अद्भुत प्रदर्शन होगा।
रावण वध और राम राज्य तिलक
तरुण जैन ने बताया कि रावण पुतला दहन के पश्चात शोभायात्रा पुनः दशहरा मैदान से निकलकर रात 8:00 बजे स्थानीय छोटे बाजार रंगमंच पर पहुँचेगी। इसके उपरांत 9:00 बजे से रावण वध एवं राम राज्य तिलक की लीला का मंचन किया जाएगा।
समिति के सभी सदस्यों ने शहर के आम जनता से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस दशहरा पर्व और लीला के आयोजनों में उपस्थित होकर धर्म लाभ लें।