रेवाँचल टाईम्स- मण्डला, जिले में शासन के निर्देशानुसार 2 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक दुग्ध समृद्धि संकल्प अभियान का आयोजन जिले भर में किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों को पशुपालन से होने वाले आर्थिक एवं पोषण संबंधी लाभों के प्रति जागरूक करना है। पशु पालन विभाग के उप संचालक यूएस तिवारी ने बताया कि कलेक्टर मण्डला मुख्यकार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा निर्देश पर अभियान चलाया जा रहा है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा संचालित यह विशेष अभियान तीन चरणों में चलाया जा रहा है जिसमें विभाग की टीम गांव-गांव जाकर पशुपालकों को जागरूक कर रही है। अभियान के अंतर्गत पशुपालकों को मुख्यत: तीन प्रमुख विषयों पर जानकारी दी जा रही है पशु पोषण उचित आहार से दूध उत्पादन कैसे बढ़ाया जा सकता है। पशुओं का स्वास्थ्य टीकाकरण बीमारियों की पहचान और समय पर इलाज की जानकारी नस्ल सुधार कृत्रिम गर्भाधान व उच्च नस्लों के उपयोग से उत्पादन क्षमता में वृद्धि तीन चरणों में चयन यह अभियान चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है प्रथम चरण ऐसे पशुपालकों का चयन किया गया है जिनके पास 10 या उससे अधिक दूध देने वाले पशु हैं। द्वितीय चरण इसमें 5 से 10 दूधारू पशु रखने वाले पशुपालक शामिल किए गए हैं। तृतीय चरण अंत में 1 से 5 पशुओं वाले छोटे पशुपालकों को जोड़ा गया है। 150 पशुपालन विभाग के कर्मचारी इस अभियान में लगे हुए हैं। कुल 5000 दूधारू पशुओं को इस मुहिम में शामिल किया गया है। यह अभियान ग्राम पंचायतों में चलाया जा रहा है। अभियान के तहत विभाग का अमला घर-घर जाकर जानकारी दे रहा है। पशुपालकों को यह बताया जा रहा है कि किस तरह से थोड़े से संसाधनों में भी वे पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय बना सकते हैं। साथ ही सरकार की योजनाओं अनुदानों मुफ्त टीकाकरण शिविरों और नस्ल सुधार कार्यक्रमों की जानकारी भी दी जा रही है। यह अभियान पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देकर न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा बल्कि पोषण स्तर में भी सुधार होगा। शासन की यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर एक मजबूत कदम है ।