दो साल से इंतज़ार, फिर भी नहीं मिला समयमान वेतनमान — भोपाल से दिल्ली तक की गई शिकायत बेअसर

 

उच्चतर माध्यमिक शिक्षक न्याय की राह में, विभागीय फाइलें अब भी दबाई गईं

दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर..

राज्य के वर्ग-1 के उच्चतर माध्यमिक शिक्षक पिछले दो वर्षों से समयमान वेतनमान की प्रतीक्षा में हैं। शासन द्वारा आदेश जारी होने के बावजूद शिक्षकों को अब तक इसका लाभ नहीं मिला है। विभागीय लापरवाही और फाइलों के जाल में पूरा मामला अटक गया है, जिससे शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है।

शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने इस विषय पर बार-बार शिक्षा विभाग से लेकर लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल तक शिकायत की, यहाँ तक कि मामला दिल्ली तक पहुंचाया गया, लेकिन अब तक किसी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई।

समय पर स्कूल पहुँचे तो भी कटता वेतन

शिक्षकों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी उनके वेतन में अनुचित कटौती कर रहे हैं। यदि कोई शिक्षक कुछ मिनट देरी से भी विद्यालय पहुँचे तो उनका वेतन काट लिया जाता है, जबकि शासन के आदेशानुसार उन्हें दो साल पहले से समयमान वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए था।

विभाग ने लिया निर्णय, पर अमल ठप

अक्टूबर 2023 में वित्त विभाग ने शिक्षा विभाग को आदेश जारी करते हुए उच्चतर माध्यमिक शिक्षकों के लिए प्रथम एवं द्वितीय समयमान वेतनमान स्वीकृत किया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से संबंधित दस्तावेज और गोपनीय चरित्रावली संकलित कर ली थी। शिक्षकों को उम्मीद थी कि अब जल्द ही वेतनमान का लाभ मिलेगा, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

वहीं अन्य संगठनों में कार्यरत शिक्षकों को यह लाभ न केवल मिल चुका है, बल्कि उन्हें एरियर्स की राशि भी प्राप्त हो चुकी है।

शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि संयुक्त संचालक लोक शिक्षण कार्यालय में जिम्मेदार बाबू फाइलें दबाकर बैठे हैं, जिसके कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही। शिक्षकों का कहना है कि यदि उच्च अधिकारी इस विषय पर गंभीरता दिखाएँ, तो कुछ ही दिनों में मामला सुलझ सकता है।

इस बीच संयुक्त संचालक लोक शिक्षण अरुण इंगले ने बताया कि “मामले की जानकारी मिली है। शीघ्र ही उचित निर्णय लेकर शिक्षकों को न्याय दिलाया जाएगा।”

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