यह 145 करोड़ भारतवासियों पर हमला, संविधान पर मनुवादी व्यवस्था का करारा तमाचा
रेवाँचल टाईम्स – गुरुग्राम, 6 अक्टूबर 2025: सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई पर एक वकील द्वारा जूता फेंकने की सनसनीखेज घटना के बाद भीम सेना प्रमुख नवाब सतपाल तंवर ने राजनीतिक साजिश का बड़ा आरोप लगाया है। तंवर ने इस घटना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मिलीभगत वाली साजिश करार दिया। उन्होंने इसे न केवल लोकतंत्र, संविधान और देश पर हमला बताया, बल्कि 145 करोड़ भारतीयों पर सीधा प्रहार भी माना। तंवर ने आरोपी वकील के खिलाफ देशद्रोह, एससी/ एसटी एक्ट, अदालत की अवमानना और हत्या की कोशिश जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की मांग की है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 1 में हुई इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। 60 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे लगाते हुए सीजेआई गवई की बेंच की ओर जूता फेंकने की कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया, लेकिन जूता बेंच तक नहीं पहुंचा। सीजेआई गवई ने इसे हल्के में लेते हुए कहा, “ये चीजें मुझे प्रभावित नहीं करतीं।” वकील को बाद में दिल्ली पुलिस ने रिहा कर दिया, लेकिन दिल्ली बार काउंसिल ने उसके प्रैक्टिस लाइसेंस को तत्काल निलंबित कर दिया। किशोर ने पूछताछ में बताया कि वह सीजेआई के हालिया खजुराहो मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति बहाली की याचिका पर टिप्पणी से नाराज था, जहां CJI ने इसे “प्रचार के लिए जनहित याचिका” कहा था।
तंवर का बयान: मनुवादी व्यवस्था का संविधान और न्यायपालिका पर तमाचा, दलित जज बर्दाश्त नहीं
भीमसेना प्रमुख नवाब सतपाल तंवर ने सोमवार शाम को प्रेस बयान जारी कर इस घटना को “देश के मुंह पर मनुवादी व्यवस्था का करारा तमाचा” बताया। उन्होंने कहा, “ये केवल जूता फेंकने की घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और पूरे देश पर हमला है। मनुवादी झुंड को बर्दाश्त नहीं हो रहा कि एक दलित का बेटा, एक अंबेडकरवादी जज इस देश का मुख्य न्यायाधीश कैसे बन गया। इस देश में मनुवादी जड़ें बहुत गहरी हैं, जातिवाद और मनुवाद बुरी तरह हावी है।”
तंवर ने साजिश के सूत्रधारों को निशाने पर लेते हुए कहा, “इस हमले के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साजिश है। मोदी, अमित शाह और मोहन भागवत कई वर्षों से जहर फैला रहे हैं, यह उसी का परिणाम है।” उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “अवैध बुलडोजर” पर सुप्रीम कोर्ट की रोक को भी इसका कारण बताया। साथ ही, एक कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य के “छाती फाड़ने वाले भड़काऊ बयानों” को जिम्मेदार ठहराया। तंवर ने सीजेआई गवई की मां का उदाहरण देते हुए कहा, “गवई की माताजी ने आरएसएस के शताब्दी कार्यक्रम में जाने से इंकार कर दिया था, क्योंकि वे और उनका परिवार अंबेडकरवादी हैं। यह घटना भी इसी का बदला हो सकती है।”
कड़ी कार्रवाई की मांग: देशद्रोह से लेकर हत्या के प्रयास तक
तंवर ने आरोपी वकील राकेश किशोर पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, “इसके खिलाफ देशद्रोह, एससी/ एसटी एक्ट, अदालत की अवमानना, जान से मारने की कोशिश आदि कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज हो। इसे जेल में डालना चाहिए।” तंवर ने पूरे दलित समाज से एकजुट होने का आह्वान किया और कहा, “यह हमला सीजेआई पर नहीं, बल्कि संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर के सपनों पर हमला है।”
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विवाद
यह घटना राजनीतिक रंग ले चुकी है। विपक्षी दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी ने इसे “न्यायपालिका पर हमला” बताते हुए सरकार की आलोचना की, जबकि भाजपा ने भीमसेना सुप्रीमो सतपाल तंवर के आरोपों को “तुष्टिकरण की राजनीति” करार दिया। सोशल मीडिया पर #JusticeForGavai और #ManuvadiConspiracy जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। सीजेआई गवई ने बाद में सभी धर्मों का सम्मान जताते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियां किसी भावना को ठेस पहुंचाने के इरादे से नहीं थीं।
यह घटना सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है, जहां जेड+ सुरक्षा वाले सीजेआई पर ऐसी कोशिश हो सकी। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन सतपाल तंवर के आरोपों ने इसे जातिगत और राजनीतिक युद्ध का रूप दे दिया है। आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।