दैनिक रेवांचल टाइम्स .. मध्य प्रदेश के डिंडोरी आदिवासी बाहुल्य जिले के पशुपालन विभाग में लगातार डॉक्टर से लेकर स्टाफ की कमी नजर आ रही है विभाग बिना डॉक्टर साहब के चल रहा है जिसका पूरा फायदा स्टाफ अपनी मनमानी कर कर उठा रहा है हम बात कर रहे हैं पशु विभाग गाड़ासराई की जहां सक्षम अधिकारी न होने के चलते स्टाफ भी अपनी मनमानी पर उतारू हो जाता है और जनता लगातार परेशान होती रहती है वैसे इसमें कोई नई बात नहीं है पशुपालन विभाग हमेशा से ही विवादों से घिरा रहा है इसकी पहले भी पशुपालन विभाग के उपसंचालक डॉक्टर एच पी शुक्ला पर भी आरोप लग चुके हैं और इसके पहले पूर्व में भी पशुपालन विभाग हमेशा से ही विवादों में घिरा रहा है मामला सिर्फ नियमों की अनदेखी का नहीं है बल्कि सत्ता और संसाधनों के बेशर्म दुरुपयोग का है शुक्ला साहब ने सरकारी गाड़ी को मानो अपनी पुश्तैनी संपत्ति समझ लिया था सप्ताहांत के आते ही विभाग की गाड़ी उनके निजी आवागमन की टैक्सी बन जाती थी विभागीय नियम कायदे को तक पर रखकर हर शनिवार और रविवार शुक्ला अपने घर आने-जाने में इस वाहन का खुलकर इस्तेमाल करते थे सवाल यह है कि क्या सरकारी पद मिलते ही इंसान कानून के ऊपर हो जाता है जब जिले में बैठे उपसंचालक शुक्ला साहब ही नियमों को दरकिनार करते हुए नियम का उल्लंघन करते हैं तो क्यों ना पशुपालन विभाग गाड़ासरई के स्टाफ द्वारा मनमानी बरती जाएगी हम बात कर रहे हैं। श्रीमती राजवती उलाड़ी मैडम की जो इस वक्त, AVFO, के पद पर पदस्थ है और उनके द्वारा लगातार मनमानी बरती जाती है सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मैडम जी विभाग में सिर्फ महीने में दो या तीन बार ही उपस्थित होती है और पेमेंट अपनी पूरी लेती है आखिर यहां सब किसके संरक्षण में चल रहा है यह तो अपने आप में एक अहम सवाल है एक तो ऊपर से डॉक्टर साहब की कमी से पशु चिकित्सा विभाग जूझ रहा है और दूसरी और श्रीमती राजवती उलाड़ी मैडम मनमानी पर उतारू हो गई है जिसके चलते पशु चिकित्सा विभाग में पशु मालिकों सही उपचार भी नहीं मिल पाता और जनता परेशान होती रहती है इतना ही नहीं विभाग के अंदरूनी सूत्रों का दावा है की योजनाओं में काम करवाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों से बाकायदा कमीशन वसूली जाती है , यानी किसनो और पशुपालकों की भलाई के नाम पर चल रही सरकारी योजनाएं सिर्फ दिखावे की बनकर रह गई है कर्मचारी दबी जुबान में मानते हैं कि विभाग में भ्रष्टाचार की जड़े बेहद गहरी है लेकिन कोई खुलकर सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां भी पता चला कि डॉ एच पीशुक्ला साहब सरकारी गाड़ी लेकर अपने पर्सनल आने जाने में डीजल की कितनी खपत की है शासन को कितना चूना लगाया है इसका भी खुलासा जल्द किया जाएगा टोल नाके से लेकर टाइम डेट से लेकर नंबर तक सभी कुछ जल्द खुलासा किया जाएगा क्योंकि जिसे बोलना है वही डर से चुप चाप है और जिसे रोकना है वह खुद इस गंदे खेल में शामिल है अब सवाल यह नहीं है कि शुक्ला दोषी या नहीं सवाल यहां है कि कब तक ऐसे अफसर विभाग को अपनी निजी दुकान की तरह चलते रहेंगे कब तक जनता के पैसों से मिलने वाली सरकारी सुविधा इन अफसरो की ऐशगाह बनी रहेगी अगर शासन प्रशासन इस बार भी आंख मूंदे बैठे रहा तो यहां तय मानिए भ्रष्टाचार की यहां गाड़ी और भी बेलगाम दौड़ेगी और विभाग की साख रसताल में जाती रहेगी क्या अब भी कोई सुनवाई होगी या फिर डिंडोरी में कानून सिर्फ आम आदमी पर ही लागू होता है पशु चिकित्सा विभाग में पूरे जिले में मनमानी चरम सीमा के पार हो चुकी है अगर उच्च स्तरी जांच हो जाए तो सारे भ्रष्टाचार खुलकर सामने आ जाएंगे।