‘कार्तिक पूर्णिमा’ के दिन किन वस्तुओं के दान से होने लगेगा नेगेटिव इफेक्ट्स! ज़रूर पढ़ लें

Kartik Purnima 2025 Daan Mistakes: धार्मिक एवं आध्यत्मिक दृष्टि से कार्तिक माह की पूर्णिमा का बड़ा महत्व हैं। इस बार 5 नवंबर, बुधवार को मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान लक्ष्मी-नारायण के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना का विधान है।

ज्योतिषयों के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 4 नवंबर की रात 10:36 बजे से होगी और इसका समापन 5 नवंबर की रात 8:24 बजे पर होगा। इस दिन स्नान, दान और दीपदान का विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

लेकिन पावन दिन पर कुछ चीजों का दान बेहद अशुभ माना गया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन किन चीजों का दान भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन किन चीजों का दान करना अशुभ

लोहे से बनी वस्तुएं

शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा का दिन बड़ा शुभ एवं फलदायक बताया गया है। इस दौरान दान पुण्य करना शुभ होता है। लेकिन,कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन लोहे से बनी वस्तुओं का दान अशुभ माना गया है। यह ग्रह शनि से जुड़ा तत्व है, और इस दिन इसका दान करने से जीवन में कठिनाइयां, आर्थिक हानि या मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

काला तिल या काला कपड़ा

कार्तिक पूर्णिमा के दिन काला तिल या काला कपड़ा भी दान करना शुभ नही माना गया है। क्योंकि काला रंग राहु और शनि ग्रह से जुड़ा होता है। इस दिन इनसे संबंधित वस्तुओं का दान करने से शुभ फल के बजाय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन सफेद, पीले या लाल रंग की वस्तुएं दान करना अधिक शुभ माना गया है।

नमक का दान

शास्त्रों के अनुसार, नमक का दान कभी भी किसी पर्व या पूर्णिमा तिथि पर नहीं करना चाहिए। नमक चंद्र और शुक्र ग्रह से संबंधित होता है। इसे दान करने से रिश्तों में कड़वाहट और पारिवारिक कलह की संभावना बढ़ सकती है।

तेल या जली हुई दीपक की बाती

कहा जाता है कि, इस शुभ अवसर पर तेल या इस्तेमाल की हुई दीपक की बाती का दान करना वर्जित माना गया है। कहते है ऐसा करने से लक्ष्मी का अपमान माना जाता है और घर में दरिद्रता का वास हो सकता है।

फटे पुराने कपड़े

कहते है दान हमेशा पवित्र भाव से किया जाता है, इसलिए कार्तिक पूर्णिमा पर पुराने, मैले या फटे कपड़े देना पाप के समान माना गया है। ऐसा करने से पुण्य के बजाय पाप लगता है और देवी-देवता प्रसन्न नहीं होते हैं।

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