दैनिक रेवांचल टाइम्स डिंडौरी, मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिले डिंडोरी में हॉस्टल,आश्रमो में वर्ष 2022-23 में रिपेरिंग वर्क करवाया गया था,जिसकी एक होस्टल की लागत राशि
लगभग 30-32 लाख रु थी,इन हॉस्टलों में छतों में हो रहे सीपेज को रोकने के लिए छतों में प्रोफ़ाइल सीट लगाया जाना था, लेकिन जिले के एक भी हॉस्टल, आश्रमो में प्रोफ़ाइल सीट नही लगी ओर ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया,जिम्मेदार कौन? लाखो खर्च के बाद होस्टल आश्रमो की वही स्थिति, जिसको लेकर अंजू व्यवहार जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने भी गंभीर आरोप लगा चुके हैं उसके बावजूद भी जिले में कोई कार्यवाही नहीं हो रही है ईओडब्ल्यू कमिश्नर से लेकर प्रदेश स्तर तक की गई है शिकायत कलेक्टर कई मामलों को लेकर शिकायत कर चुकी है इसके बावजूद संतोष शुक्ला पर राजनीतिक पकड़ के चलते किसी भी प्रकार की कार्रवाई न होना अपने आप में अहम सवाल है सहायक एक संतोष शुक्ला तो वैसे हमेशा ही विवादों में घिरे रहे हैं बड़े से बड़े जनप्रतिनिधि ने उनकी ऊपर बड़े-बड़े आरोप लगा चुके है इसके बावजूद भी राजनीतिक संरक्षण के चलते इनके ऊपर कारवाई ना होना एक बड़ा सवाल पैदा करता है अपने ही रिश्तेदार की आईडी और कंट्रक्शन के नाम पर फॉर्म चला रहे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र डिंडोरी में सरकारी राशि का गण करते हुए शानदार पैसों की होली खेली जा रही है। इसके बावजूद भी जिले के बड़े-बड़े जनप्रतिनिधि विधायक से लेकर संसद आदिवासी पर हो रहे अत्याचारों का आज तक नहीं उठा पाए सवाल दिखावे के नाम पर सब अपनी जेब गर्म करने पर लगे हुए हैं करोड़ों रुपए का घटिया सामान एवं घाटिया सप्लाई आर्डर देकर समान स्कूल भेजा गया जिन प्राचार्य ने लेने से मना किया उन पर दबाव बनाया गया मजबूरी के चलते जिले के सारे हॉस्टल अधीक्षकों ने अपने पिताजी के आदेश का पालन करते हुए सभी लोगों ने जहर का घूंट पी गए जिसके चलते मासूम बच्चे भी जर्जर छत के नीचे पढ़ाई करने पर मजबूर है सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला का भ्रष्टाचार कब तक डिंडोरी जिले में चलता रहेगा यहां तो अपने आप में अहम सवाल हैं जिम्मेदार अधिकारी कब तक अपनी जांच के नाम पर पल्ला झड़ते रहेंगे ।