शैक्षणिक घोटाला : एक ही छात्रा की दो अंकसूचियाँ, कार्रवाई शून्य

विभागीय जांच में अपराध प्रमाणित, फिर भी सहायक आयुक्त की रहस्यमयी चुप्पी

डिंडोरी। जिले की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों एक सनसनीखेज घोटाले को लेकर सवालों के घेरे में है। शैक्षणिक सत्र 2018-19 में कक्षा सातवीं की एक ही छात्रा के नाम पर दो अलग–अलग विद्यालयों से दो अलग–अलग अंकसूचियाँ जारी किए जाने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि विभागीय जांच में पूरा फर्जीवाड़ा अपराध की श्रेणी में प्रमाणित होने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है।

कैसे खुला फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

मामला माध्यमिक शाला सरई के एक शिक्षक की पुत्री कुमारी ज्योति चंदेल से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि छात्रा ने वास्तविक रूप से सत्र 2018-19 में अमर ज्योति विद्यालय, अमरपुर से कक्षा सातवीं की परीक्षा दी थी। स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार उसका परीणाम 38 प्रतिशत (ग्रेड-D) तथा उपस्थिति 183 दिवस दर्ज है।

इसी बीच माध्यमिक शाला सरई से एक दूसरी अंकसूची तैयार करवाई गई, जिसमें छात्रा को A+ ग्रेड के साथ उत्तीर्ण दर्शाया गया और उसकी उपस्थिति 193 दिवस बताई गई। जबकि जांच में यह भी स्पष्ट हो गया कि छात्रा उस वर्ष माध्यमिक शाला सरई में दर्ज ही नहीं थी।

जांच में अपराध सिद्ध

विभाग द्वारा गठित जांच दल ने पुष्टि की कि माध्यमिक शाला सरई के स्टाफ द्वारा छात्रा को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
इस संबंध में जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) ने अपने प्रतिवेदन में साफ लिखा—

> “एक ही सत्र में दो विद्यालयों में अध्ययन कर परीक्षा देकर परिणाम प्राप्त करना नियम विरुद्ध है एवं अपराध की श्रेणी में आता है।”

 

कार्रवाई के नाम पर चुप्पी

जांच प्रतिवेदन के आधार पर मामला सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, डिंडोरी – श्री संतोष शुक्ला को कार्रवाई हेतु भेजा गया, लेकिन आरोप है कि अब तक किसी भी दोषी के खिलाफ न कोई एफआईआर दर्ज हुई और न ही विभागीय दंडात्मक कार्रवाई।

आवेदकों का कहना है कि सहायक आयुक्त द्वारा मामले को दबाकर रखना सीधे तौर पर मिलीभगत और संरक्षण की ओर इशारा करता है, जिससे शिक्षा विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मुख्य आरोपी

मौले सिंह पुशाम – तत्कालीन प्रधानाध्यापक, माध्यमिक शाला सरई

अंजोरा तेकाम – कक्षा अध्यापक

बलराम सिंह चंदेल – माध्यमिक शिक्षक एवं छात्रा के पिता

आरोप

एक ही सत्र में दोहरी अंकसूची तैयार करना

फर्जी उपस्थिति दर्ज करना

सरकारी नियमों का उल्लंघन कर शैक्षणिक धोखाधड़ी

मुख्य मांग

पूरे प्रकरण को आपराधिक घोषित करते हुए तीनों आरोपियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था की साख बनी रहे और भविष्य में कोई इस तरह का फर्जीवाड़ा करने का साहस न कर सके।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
जब अपराध जांच में प्रमाणित हो चुका है, तब न्याय कब मिलेगा?
या फिर यह घोटाला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

Comments (0)
Add Comment