दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला, महिला एवं बाल विकास विभाग, जन साहस और आवाज ने प्रतिभागियों को प्रदान की बाल संरक्षण संबंधी किट
जोखिम ग्रस्त और हाशिए में रह रहे बालकों के चिन्हांकन और उनके संस्थागत पुर्नवास के लिए नवाचार
आदर्श बाल गृह मंडला में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के अंर्तगत बाल देखरेख संस्था में सीएनसीपी बालकों के प्रवेश हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन बाल कल्याण समिति जिला मंडला,महिला एवं बाल विकास विभाग मंडला और सीमा सोशल वेलफेयर सोसायटी मंडला ने संयुक्त रूप से किया।
यह कार्यशाला जिले में जोखिम ग्रस्त और हाशिए में रह रहे बालकों के चिन्हांकन और उनके संस्थागत पुर्नवास के लिए एक नवाचार है।जोखिम ग्रस्त और हाशिए में रह रहे बालकों के चिन्हांकन के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन का पूल तैयार किया जा रहा है। इसके लिए जिले में बाल संरक्षण के लिए कार्यरत संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ता और महिला बाल विकास विभाग में इम्पैनल सपोर्ट पर्सन को चिन्हित किया गया है। इनके क्षमतावर्धन के लिए जिले में समयबद्ध तरीके से कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इसी कड़ी में मंडला में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के अंर्तगत बाल देखरेख संस्था में सीएनसीपी बालकों के प्रवेश हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्जवलन और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।मंचासीन समस्त अतिथियों का पुष्प से स्वागत किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग के सामाजिक कार्यकर्ता श्री सौरभ पटवा ने कार्यशाला की प्रस्तावना रखी। कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों ने अपना परिचय दिया, सभी प्रतिभागियों का पुष्प से स्वागत किया गया। किशोर न्याय बोर्ड के पूर्व सदस्य श्री अब्दुल गनी खान ने आदर्श बाल गृह का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। आपने बताया कि,वर्ष 2013 से महिला एवं बाल विकास विभाग से मान्यता प्राप्त होने के बाद से निरंतर संचालित है। प्रारंभ से अभी तक 264 बच्चों को बाल गृह में प्रवेश दिया जाकर उनके सर्वोत्तम हित के लिए नियमानुसार सभी कार्यवाही की गई।बाल कल्याण समिति जिला मंडला के आदेश पर अभी तक 256 बालकों का पारिवारिक पुर्नवास कराया गया है। कार्यशाला के उद्देश्य पर बाल कल्याण समिति जिला मंडला की सदस्या श्रीमती तृप्ति शुक्ला, सदस्य रंजीत कछवाहा और संतोष कुमार यादव ने अपने विचार रखे।
बाल कल्याण समिति जिला मंडला के अध्यक्ष गजेन्द्र गुप्ता ने बताया कि,इस कार्यशाला का उद्देश्य मंडला जिले में 18 वर्ष की आयु तक के ऐसे बच्चे जिन्हें संस्थागत देखरेख की आवश्यकता है का चिन्हांकन कर बाल देखरेख संस्था में प्रवेश दिलाना है। गजेन्द्र गुप्ता ने कार्यशाला के दो तकनीकी सत्र में प्रतिभागियों को संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन,बाल अधिकार, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 के प्रावधानों तथा देखरेख और संरक्षण के जरुरतमंद बालक और उनके संस्थागत देखभाल प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
महिला एवं बाल विकास विभाग के संरक्षण अधिकारी श्री रितेश बघेल ने मिशन वात्सल्य के संस्थागत और गैर संस्थागत देखरेख योजना के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी।सामाजिक कार्यकर्ता सौरभ पटवा ने आपातकाल में सहयोग के लिए चाइल्ड लाइन और अन्य आवश्यक नंबरों की जानकारी प्रतिभागियों से साझा की। काशी विश्वनाथ वैदिक गुरुकुल के संचालक आचार्य श्री भीमदेव ने सभी प्रतिभागियों को बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। निधि अग्रवाल और खेमराज मलगाम ने कार्यशाला के संबंध में अनुभव कथन किया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला के संबंध में फीडबैक प्रदान किया।मंडला जिले में महिला एवं बाल विकास से मान्यता प्राप्त आदर्श बाल गृह (बालक) संचालित है।बाल गृह के अधीक्षक अकील अहमद खान ने बताया कि,पचास बच्चों की क्षमता वाला यह बाल गृह वर्ष 2013 से संचालित है,बाल कल्याण समिति के आदेश पर यहां देखरेख और संरक्षण के जरुरतमंद वाले बालकों की संस्थागत देखभाल की जाती है।
वही सभी प्रतिभागियों को अतिथियों के द्वारा सहभागिता का प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। इस कार्यशाला में 46 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।प्रतिभागियों में जिले में बाल संरक्षण के लिए कार्यरत संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ता, महिला बाल विकास विभाग में इम्पैनल सपोर्ट पर्सन और आदर्श बाल गृह के कर्मचारी शामिल रहे। महिला एवं बाल विकास विभाग,जन साहस संस्था और आवाज संस्था ने प्रतिभागियों को बाल संरक्षण संबंधी किट प्रदान किया। कार्यशाला के आयोजन में महिला बाल विकास विभाग एवं आदर्श बाल गृह के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सहयोग किया।
बाल कल्याण समिति क्या करता है?
बाल कल्याण समिति भारत में किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत गठित एक स्वायत्त संस्था है, जो उन बच्चों से संबंधित शिकायतों को संभालने और हल करने के लिए है जो या तो त्याग दिए गए हैं, अनाथ हैं , माता-पिता द्वारा स्वेच्छा से दिए गए हैं, या खो गए हैं और जिन्हें विकास, सुरक्षा, उपचार, विकास और पुनर्वास से संबंधित मुद्दों पर देखभाल की आवश्यकता है।
गजेन्द्र गुप्ता अध्यक्ष
बाल कल्याण समिति मंडला