गरीबों के लिए संकल्पित शासन, पर जिम्मेदारों की लापरवाही से योजनाओं पर लग रहा “पतीला”

पात्रता पर्ची के लिए दर-दर भटक रहा गरीब श्रमिक, जिला प्रशासन पर उठे सवाल

 

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। एक ओर सरकार गरीबों के कल्याण और उन्हें हर योजना का लाभ दिलाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही इन योजनाओं पर “पतीला” लगाती नजर आ रही है।

मंडला जिले की घुघरी तहसील अंतर्गत ग्राम भैसवाही निवासी गरीब श्रमिक रावन सिंह धुर्वे आज भी अपने हक के लिए भटकने को मजबूर हैं।

गरीबी में जीवन, फिर भी योजनाओं से बाहर रावन सिंह धुर्वे कृषि मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। पत्नी और चार बच्चों के साथ उनका परिवार अत्यंत कमजोर आर्थिक स्थिति में जीवन यापन कर रहा है। इसके बावजूद उनका नाम अब तक गरीबी रेखा सूची में शामिल नहीं किया गया है, जिसके चलते उन्हें शासकीय राशन तक नहीं मिल पा रहा है।

सवाल यह है कि जब पात्र व्यक्ति ही सूची से बाहर है, तो योजनाओं का लाभ आखिर किसे मिल रहा है?

बार-बार आवेदन, फिर भी नहीं सुनवाई

पीड़ित श्रमिक का कहना है कि उन्होंने कई बार आवेदन और निवेदन किए, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

यह स्थिति साफ दर्शाती है कि प्रशासनिक स्तर पर या तो गंभीर लापरवाही हो रही है या फिर जानबूझकर गरीबों के हक को नजरअंदाज किया जा रहा है।

योजनाओं की हकीकत आई सामने

सरकार भले ही गरीबों के लिए योजनाओं को लेकर दृढ़ संकल्पित हो, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन नजर आ रहे हैं।

नतीजा यह है कि

पात्र हितग्राही योजनाओं से वंचित हैं

गरीबों को उनका अधिकार नहीं मिल रहा

योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा

जिला प्रशासन कटघरे में यह मामला सीधे तौर पर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

क्या अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित रह गई है?

क्या जनसुनवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है?

पीड़ित की मांग

गरीबी रेखा सूची में नाम जोड़ा जाए

पात्रता पर्ची तत्काल जारी की जाए

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए

अब देखना होगा…

क्या जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा? या फिर एक गरीब श्रमिक यूं ही अपने अधिकार के लिए भटकता रहेगा?

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