रेवांचल टाइम्स | मंडला (मध्यप्रदेश)मंडला जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) के बहुचर्चित घोटाले पर आखिरकार सरकार ने कड़ा एक्शन लेते हुए साफ संकेत दे दिया है कि अब “सेटिंग सिस्टम” ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाला। कुड़ैला–मवई सड़क निर्माण में भारी अनियमितताओं और घटिया गुणवत्ता के खुलासे के बाद विभागीय अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।
वर्षों पुराना खेल, अब खुली पोल
मंडला में सड़क, पुल-पुलिया और भवन निर्माण के नाम पर लंबे समय से भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी थीं। ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया सामग्री, फर्जी माप और कागजों में ही “परफेक्ट” काम दिखाकर सरकारी धन की खुली लूट की जा रही थी। शिकायतें होती रहीं, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी और संरक्षण के चलते हर मामला दबा दिया जाता था।
कुड़ैला–मवई सड़क बनी “घोटाले की मिसाल”
इस बार मामला कुड़ैला–मवई मार्ग के उन्नयन कार्य का था, जहां जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए। सड़क निर्माण में गुणवत्ता इतनी खराब पाई गई कि कई हिस्सों में मानक पूरी तरह ध्वस्त मिले। ड्रेनेज सिस्टम फेल और तकनीकी नियमों की खुलेआम अनदेखी ने पूरे काम की पोल खोल दी।
एक्शन मोड में सरकार, तीन अधिकारी निलंबित
जैसे ही जांच रिपोर्ट भोपाल के वल्लभ भवन पहुंची, तुरंत कार्रवाई की गई—
सहायक यंत्री जी.एस. भलावी (कार्यपालन यंत्री का प्रभार) – निलंबित
उपयंत्री विकास मरकाम – निलंबित
उपयंत्री व प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी संजय कुमार द्विवेदी – निलंबित
मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन और गंभीर लापरवाही के आरोप में इन पर गाज गिरी है। तीनों का मुख्यालय अब सागर परिक्षेत्र निर्धारित किया गया है।
क्या सिर्फ “बलि के बकरे” या पूरी चेन पर वार?
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या कार्रवाई सिर्फ इन तीन अधिकारियों तक सीमित रहेगी या फिर ठेकेदारों और पूरे भ्रष्ट नेटवर्क पर भी शिकंजा कसा जाएगा?
विशेषज्ञों का साफ कहना है—यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार है, जिसमें बिना मिलीभगत के इतना बड़ा खेल संभव ही नहीं।
जनता में गुस्सा भी, राहत भी
स्थानीय लोगों ने पहले ही सड़क की खराब गुणवत्ता पर आवाज उठाई थी, लेकिन शिकायतों को दबा दिया गया। अब कार्रवाई के बाद लोगों में जहां गुस्सा है, वहीं यह उम्मीद भी जगी है कि शायद अब सिस्टम सुधरे।
राजनीति में भी गर्माया मामला
सरकार इसे “जीरो टॉलरेंस” की नीति का हिस्सा बता रही है, जबकि विपक्ष इसे देर से उठाया गया कदम कहकर सवाल खड़े कर रहा है।
❓ अब असली परीक्षा बाकी
सरकार की यह कार्रवाई पहली चोट जरूर है, लेकिन असली सवाल अभी बाकी हैं—
क्या ठेकेदारों पर भी कार्रवाई होगी?
क्या घटिया निर्माण की भरपाई कराई जाएगी?
क्या भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकी जा सकेगी?
फिलहाल मंडला PWD घोटाले ने यह साफ कर दिया है कि अगर जांच निष्पक्ष हो, तो बड़े से बड़ा अधिकारी भी बच नहीं सकता। लेकिन यह लड़ाई अधूरी है—अब देखना होगा कि यह कार्रवाई अंत तक जाती है या फिर फाइलों में दबकर रह जाती है।
मंडला जिला जो कि बैगा आदिवासी बहुल्य जिला है जहाँ विकास के नाम पर लूट मची हुई है और इस ओर न जिला प्रशासन के मुखिया और जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी और विधायक सांसद और जनप्रतिनिधियों केवल जाँच की बात कर लोगो को चुप करने की आदत सी पड़ गई है और जैसे ही मामला शांत होता है वैसे ही भ्रष्ट तंत्र और भ्रष्टाचारी अपने रूप ले लेते है और जाँच ठंडे वास्ते में धूल खाती नज़र आती है आज तक किसी भी भ्रष्ट या भ्रष्टाचारी अधिकारी कर्मचारी की जांच पूर्ण नही हो सकी न ही उस के ऊपर दण्डात्मक कार्यवाही हो पाई वही कुछ मामंले माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन चल रहे हैं