जागरूकता काफी नहीं, सरकार बाँटे मुफ्त हेलमेट जान बचाओ, चालान मत काटो जनता की पुकार

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, पुलिस विभाग के द्वारा सड़क सुरक्षा के नाम पर पुलिस-प्रशासन हर तरफ हेलमेट पहनने का ढोल पीट रहा है, जागरूकता रैलियाँ निकल रही हैं, समझाइशें दी जा रही हैं, और लोगों को चालान की मार झेलनी पड़ रही है – मगर हकीकत यह है कि गरीब-मध्यमवर्गीय नागरिक के पास ISI मार्क वाला महँगा हेलमेट खरीदने की हैसियत ही नहीं। लोग मजबूरी में सस्ता, घटिया हेलमेट खरीद रहे हैं या बिना हेलमेट के ही निकल पड़ते हैं। पर पुलिस को केवल मोटरसाइकिल चालक की जान की चिंता सता रही और उनके हेलमेट पीछे पड़ गई हैं, वही दूसरी तरफ सवारी वाहनो से कन्नी काटती नजर आ रही बस, ऑटो, बोलोरो ट्रेक्स में अंदर तो अंदर बाहर और वाहन के ऊपर तक धड़ल्ले पुलिस चेकिंग के सामने निकल रही है वो निकल सकती हैं क्योंकि उसका हप्ता और महीना फिक्स पहुँच रहा है और जिन वाहनो का हप्ता महीना नही पहुँच रहा है वह कार्यवाही की मार झेल रहा है। बचे मोटरसाईकिल चालक ये हप्ता महीना नही देते है तो उनको हेलमेट कागजात के नाम पर चाहे जब चेकिंग लगाकर धमका कर चालान काटे जाते है जिससे शासन का राजस्व तो बढ़ाता ही साथ चेकिंग अधिकारियों का भी राजस्व बढ़ता नजर आ राह आ हैं
नागरिकों का साफ सवाल है – जब शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर सरकार अरबों-खरबों बहा रही है, तो हेलमेट जैसी छोटी-सी सुरक्षा के लिए क्यों नहीं कोई ठोस योजना? क्यों नहीं पूरे मध्य प्रदेश में, खासकर मंडला जिले में मुफ्त हेलमेट वितरण योजना तुरंत लागू की जाती?
लोग कहते हैं:
अनावश्यक खर्चों में कटौती कर हेलमेट पर फोकस करें।
चालान काटने की बजाय हेलमेट बाँटें – चालान का पैसा हेलमेट में लगाएँ।
सस्ते हेलमेट पर रोक लगाने के बजाय अच्छे लेकिन किफायती हेलमेट उपलब्ध कराएँ।
जगह-जगह हेलमेट वितरण कैंप लगाएँ, ताकि हर दोपहिया चालक के पास ‘जीवन रक्षा का कवच’ हो।
यदि सरकार को सच में जनता की जान की चिंता है, तो सिर्फ हेलमेट पहनो कहना काफी नहीं।
हेलमेट दो, जान बचाओ
यह नारा अब मंडला की सड़कों से उठ रहा है। प्रशासन और सरकार से माँग है जागरूकता से आगे बढ़ें, व्यावहारिक कदम उठाएँ। हेलमेट वितरण योजना लागू कर दिखाएँ – यही सच्ची सड़क सुरक्षा होगी, यही सोने में सुहागा!

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