जाति बदलो, जमीन खरीदो, प्लाट बेचों, नया स्टार्टअप मॉडल

मंडला में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे आदिवासी भूमि की खरीद-फरोख्त का खेल, है जारी जांच की मांग

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रेवांचल टाइम्स मंडला— आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में इन दिनों प्रशासन की नाक के नीचे कैसे गैर आदिवासी समाज के द्वारा जिले के भोले- भाले आदिवासीयों के साथ में छल कपट पूर्वक जमीन खरीद फरोख्त का खेल खेला जा रहा हैं आज आपको हम इससे रुबरु करवाते हैं।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंडला जिले में शादी होकर आई पिछड़ा वर्ग की छाया कश्मीरे जो छिंदवाड़ा जिले के परासिया की मूल निवासी है जो कि मंडला जिले में वह अन्य पिछड़ा वर्ग में अति है पर परसिया में कुछ जाति को विशेष दर्जा दिया गया था जहाँ छाया कश्मीरे को विगत कुछ वर्षों में अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया था पर सूत्रों से प्राप्त जानकारी के छाया कश्मीरे और उंसके परिवार में द्वारा मंडला जिले में अपनी जाति का लाभ उठाते हुए अब नई पहल की जा रही है जहाँ वह आदिवासी की कृषि भूमि अन्य भूमि को सस्ते दामो में लेकर व्यावसायिक के साथ साथ कालोनाइजर बन बैठी है और वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त कार्य करने के लिए कूटरचित दस्तावेजों के आधार और परासिया के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विभाग के जाति प्रमाण पत्र का हवाला देकर खुद को आदिवासी महिला बतला कर छाया कश्मीरे नामक महिला द्वारा कथित रूप से फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर स्वयं को आदिवासी बताते हुए और उसी आधार पर आदिवासियों से सस्ती दरों पर जमीन खरीदने का मामला सामने आया है। आरोप है कि मंडला जिले की खैरी ग्राम पंचायत के *खसरा नो 391/4* जिसका कुल *रकबा 0.83 हे.* जमीन खरीदने के बाद छाया कश्मीरे नामक महिला द्वारा उसे छोटे-छोटे प्लाटों में काटकर महंगे दामों पर बेचा जा रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि आदिवासी समाज की जमीन को बचाने के लिए बने कानूनों का मंडला जिले में प्रशासन की नाक के नीचे सीधे- साधे आदिवासियों के लिए बनाए गए कानून का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। नियमों के अनुसार गैर-आदिवासी, आदिवासी के नाम से दर्ज भूमि नहीं खरीद सकता, लेकिन छाया कश्मीरे और उसके परिवार वालों ने उसका गलत तरीकें से फर्जी दस्तावेजों के जरिए यह खेल खेला और यह सब लंबे समय से चल रहा है।

हमारे पास जो दस्तावेज़ उपलब्ध हैं जिसमें छाया कश्मीरे नामक महिला ने शासकीय अभिलेखों में खुद को अनुसूचित जनजाति का सदस्य दर्शाया हैं, जबकि वास्तविकता इसके उलट कुछ और ही बताई जा रही है। ग्रामीणों ने नाम न बतलाने और आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

तो वहीं दैनिक रेवांचल टाइम्स की टीम जब उक्त मामले को लेकर संबंधित महिला के दस्तावेजों की पड़ताल कि तो पता चला कि छाया कश्मीरे नामक महिला ने *वर्ष 2005- 06* में अपना जाती प्रमाण पत्र छिंदवाड़ा जिले के परासिया से जारी होना दिखलाया हैं। जबकि रेवांचल टाइम्स मंडला की टीम के द्वारा जब छिंदवाड़ा जिले के परासिया तहसील के कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (रा.) से उक्त महिला के जाती प्रमाण पत्र की जानकारी ली गई तो पता चला कि संबंधित प्रमाण पत्र परासिया अनुविभागीय कार्यालय अधिकारी (रा.) परासिया जिला छिंदवाड़ा से जारी ही नहीं किया गया हैं। तो फिर सवाल यह उठता हैं कि आखिर छाया कश्मीरे नामक महिला का जो जाती प्रमाण पत्र है वो कहा से जारी किया गया और आख़िर किसके द्वारा जारी किया गया यह एक जांच का विषय बनता है। इस विषय को लेकर जिला प्रशासन को उक्त महिला के सम्बन्धित दस्तावेजों की जांच कराई जानी चाहिए, और यदि छाया कश्मीरे नामक महिला का जाती प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो ग्राम खैरी स्थित योगिराज अस्पताल से लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर  पी.एम. श्री महाविद्यालय के बाजू से स्थित सड़क किनारे से लगी हुई भूमि जिसका

*खसरा नो 391/4* जिसका कुल *रकबा 0.83 हे.*

जमीन का सौदा निरस्त कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, और मंडला जिला प्रशासन को स्वतः मामला संज्ञान में लेते हुए राज्य स्तरीय छानबीन समिति से उक्त मामले की जांच करवाते हुए छाया कश्मीरे नामक महिला के जाति प्रमाण पत्र की जांच करवानी चाहिए। जिससे आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में शासन प्रशासन के द्वारा एक मिशाल पेश की जा सकें। जिससे मंडला जिले में भविष्य में यदि आदिवासी समाज की जमीन का कोई गलत तरीके से खरीद फरोख्त करने की जुगत में लगा हुआ हो तो उसमें रोक लगाई जा सकें।

यह मामला सिर्फ जमीन घोटाले का नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों पर सीधा हमला माना जा रहा है।

 

*मंडला में जाति बदलो, जमीन खरीदो, प्लाट बेचो – नया स्टार्टअप मॉडल*

 

मंडला जिले में आजकल नया बिजनेस मॉडल चल पड़ा है –

नाम रखो:

*“जाति ट्रांसफॉर्मेशन प्राइवेट लिमिटेड”*

सुबह सामान्य नागरिक, दोपहर तक आदिवासी, और शाम को रियल एस्टेट कारोबारी!

कागज कहते हैं – आप आदिवासी हैं,

हकीकत कहती है – आप दलाल हैं।

पहले आदिवासी भाई से कहा –

“बहन हूँ, सस्ते में जमीन दे दो।”

फिर शहर वालों से कहा –

“भाई साहब, प्राइम लोकेशन है, मेडिकल कॉलेज भी खुलने वाला है रेट चार गुना लगेगा।” कानून बेचारा फाइलों में सो रहा हैं, और जमीन प्लाटों में टूट रही।

अगर आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला का यही विकास है,

तो आदिवासी कहेंगे –“हमारी पहचान गई,

और पैसा, पहुंच पकड़ वालों और रसूख दारों की कॉलोनी बन गई।” और बेचारे इस जिले के भोलेभाले आदिवासियों के साथ हमेशा से छला जा रहा है और सब हाथ बाँधे खड़े देख रहें है।

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