मंडला में पंचायतों का ‘खुला कमीशन राज’: बिना निविदा निर्माण सामग्री खरीद, नियम-कानून की खुलेआम धज्जियां
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में ग्राम पंचायतें अब ‘कानून से ऊपर’ हो गई हैं। यहां निर्माण सामग्री से लेकर अन्य जरूरी वस्तुओं की खरीद बिना किसी निविदा के खुलेआम हो रही है। अखबारों में निविदा प्रकाशित करने की तो बात ही दूर, न तो MP Tenders Portal पर कोई जानकारी है और न ही GeM पोर्टल का सहारा लिया जा रहा है। यह सब शासन-प्रशासन की मिलीभगत में हो रहा है, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा का गला घोंट दिया गया है।
मध्य प्रदेश भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम-2015 (यथा संशोधित 2022) के स्पष्ट प्रावधानों के मुताबिक, अनुमानित मूल्य 50,000 रुपये तक बिना कोटेशन के खरीद संभव है, लेकिन 50,001 से 2.50 लाख रुपये तक कम से कम तीन विक्रेताओं से GeM पर तुलना अनिवार्य है। वहीं 2.50 लाख रुपये से अधिक की खरीद या निर्माण कार्यों के लिए ओपन निविदा बाध्यकारी है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के एक दैनिक अखबार और राज्य स्तर के दो अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कर MP Tenders Portal या GeM पर निविदा आमंत्रित की जानी चाहिए। निर्माण कार्यों के लिए यह नियम और भी सख्त हैं, जहां पूरा काम ठेकेदार को देने से पहले निविदा प्रक्रिया पारदर्शी रूप से पूरी करनी होती है। लेकिन मंडला की अधिकांश ग्राम पंचायतों में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
वही जानकारों का कहना है कि सरपंच, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, उपयंत्री, एसडीओ और मुख्य कार्यपालन अधिकारी आपसी तालमेल बनाते हुए फिक्स कमीशन पर ठेकेदारों को काम सौंप रहे हैं। ठेकेदार अवैध रूप से पंचायत के काम कर रहे हैं, जबकि निविदा प्रक्रिया दरकिनार कर सामग्री की खरीद सीधे ‘पसंदीदा’ आपूर्तिकर्ताओं से की जा रही है। इससे न केवल सरकारी धन की लूट हो रही है, बल्कि गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब ‘कमीशनखोरी का जाल’ है, जिसमें अधिकारी-कर्मचारी और ठेकेदार मिलकर जनता के पैसे को लूट रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि जिला प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे। विगत दो वर्षों में सभी ग्राम पंचायतों के निर्माण कार्यों और सामग्री खरीद की जांच हो, जिसमें यह देखा जाए कि किन कामों में निविदा आमंत्रित की गई और किनमें नहीं। जिन मामलों में नियमों का उल्लंघन हुआ, उनमें दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई हो। भविष्य में कोई भी काम बिना निविदा प्रक्रिया के न कराया जाए।
यह मामला सिर्फ मंडला तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यदि शासन अब भी चुप्पी साधे रहा, तो यह भ्रष्टाचार का ‘खुला अड्डा’ बन जाएगा। प्रशासन को अब जागना होगा, वरना जनता का विश्वास टूट जाएगा।