राष्ट्रीय रेल्वे संघर्ष समिति मंडला के आव्हान पर विशाल धरना प्रदर्शन

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रेवांचल टाइम्स मंडला 17 फरवरी 2026 मंडला लोकसभा क्षेत्र के जिला मुख्यालय मंडला में आज राष्ट्रीय रेलवे संघर्ष समिति के आह्वान पर विशाल एवं शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन से लंबी दूरी की रेल सेवाएं प्रारंभ करने, नई रेल लाइनों के निर्माण तथा क्षेत्र को प्रदेश और देश के प्रमुख शहरों से जोड़ने की मांग को लेकर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
मंडला में वर्ष 1990 से मंडला फोर्ट के नाम से रेलवे स्टेशन स्थापित है। प्रारंभ में यहां नैरोगेज लाइन संचालित होती थी। वर्ष 2018 में ब्रॉडगेज में रूपांतरण के बाद क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि मंडला सीधे प्रमुख शहरों से जुड़ सकेगा। साथ ही अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से स्टेशन का उन्नयन कर आधुनिक सुविधाओं से युक्त भवन तैयार किया गया है। इसके बावजूद ब्रॉडगेज परिवर्तन के आठ वर्ष बाद भी यहां से केवल नैनपुर तक लगभग 30 किलोमीटर की सीमित रेल सेवा ही संचालित हो रही है। समिति का कहना है कि इससे न तो रेल्वे को पर्याप्त राजस्व प्राप्त हो पा रहा है और न ही क्षेत्र की आदिवासी जनता को अपेक्षित सुविधा मिल रही है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि मंडला लोकसभा क्षेत्र आदिवासी एवं आरक्षित क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के नागरिक निवास करते हैं। रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार और पर्यटन के लिए लोगों को जबलपुर, नागपुर, भोपाल तथा अन्य महानगरों की यात्रा करनी पड़ती है, लेकिन सीधी रेल सेवा के अभाव में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि इस संबंध में पूर्व में भी कई बार ज्ञापन और धरना-प्रदर्शन किए जा चुके हैं। 9 फरवरी 2026 को भी मंडला फोर्ट स्टेशन के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर शासन का ध्यान आकर्षित किया गया था, किंतु अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
आज का धरना पूर्णतः गांधीवादी एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में उग्र आंदोलन, चक्का जाम, रेल रोको और सड़क रोको जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
प्रमुख मांगें
समिति ने अपनी मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए निम्न प्रमुख प्रस्ताव रखे—
इंदौर से नैनपुर तक संचालित पेंचवेली एक्सप्रेस को मंडला तक विस्तारित किया जाए।
मंडला से नागपुर के लिए रात्रिकालीन रेलगाड़ी प्रारंभ की जाए।
मंडला से जबलपुर के लिए कम से कम तीन फेरे नियमित रूप से संचालित किए जाएं।
मंडला को छत्तीसगढ़ से जोड़ने हेतु बालाघाट–गोंदिया–रायपुर तक एक नई रेल सेवा प्रारंभ की जाए।
मंडला से मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के लिए रात्रिकालीन रेल सेवा चलाई जाए।
मंडला से जबलपुर के बीच दोहरी रेल लाइन निर्माण की स्वीकृति दी जाए।
मंडला फोर्ट से घंसौर स्टेशन तक लगभग 35 किलोमीटर नई रेल लाइन का निर्माण शीघ्र प्रारंभ किया जाए।समिति का तर्क है कि इन मांगों के पूर्ण होने से मंडला उत्तर एवं दक्षिण भारत से सीधे जुड़ सकेगा। इससे क्षेत्र के आदिवासी समुदाय को रोजी-रोटी, स्वास्थ्य सुविधाएं, उच्च शिक्षा और व्यवसाय के अवसरों तक पहुंच आसान होगी। पर्यटन की दृष्टि से भी मंडला महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्टेशन के निकट से ही मध्यप्रदेश की जीवनरेखा मां नर्मदा प्रवाहित होती है। प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व के कारण यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आ सकते हैं, बशर्ते बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध हो।
समिति ने यह भी बताया कि मंडला स्टेशन के पास लगभग 70 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जहां टर्मिनल स्टेशन के रूप में विकसित करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। यहां यात्री विश्राम गृह, रेलवे अधिकारियों एवं कर्मचारियों के आवास, गार्ड, ड्राइवर तथा अन्य स्टाफ के ठहरने की सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध होने के कारण आधारभूत संरचना विकसित करने में भी कोई विशेष बाधा नहीं है।
धरना-प्रदर्शन के अंत में समिति ने शासन से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की। नागरिकों ने एक स्वर में कहा कि मंडला जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ना केवल सुविधा का प्रश्न नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास और सामाजिक न्याय का भी विषय है। अब यह देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर कितनी शीघ्रता से निर्णय लेकर मंडला को व्यापक रेल संपर्क प्रदान करती है।

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