मंडला में भ्रष्टाचार की नई मिसाल! कबाड़ में तब्दील लाखों की मशीन, किसानों के नाम पर फिर हुआ खेल?

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दैनिक रेवांचल टाइम्स  – मंडला। मध्यप्रदेश के मंडला जिले में विकास के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। किसानों की सुविधा और धान की साफ-सफाई एवं ग्रेडिंग के लिए लगभग 5 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई मशीन आज खुले आसमान के नीचे जंग खाकर कबाड़ में तब्दील होती जा रही है।

जानकारी के अनुसार यह मशीन MP Warehousing & Logistics Corporation द्वारा MP State Agro Industries Development Corporation के माध्यम से खरीदी गई थी। उद्देश्य था कि किसानों को धान की सफाई और ग्रेडिंग की आधुनिक सुविधा उपलब्ध हो सके, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य मिल सके। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

खुले आसमान के नीचे सड़ रही मशीन

बताया जा रहा है कि मशीन पिछले लगभग एक वर्ष से खुले में पड़ी हुई है। बारिश, धूप और धूल की मार झेलते-झेलते अब इस पर जंग लग चुकी है। जिस मशीन से किसानों की आमदनी बढ़नी थी, वही अब सरकारी लापरवाही की गवाही दे रही है।

स्थानीय नागरिकों और किसानों का कहना है कि यदि मशीन तकनीकी रूप से उपयुक्त नहीं थी, तो उसकी खरीदी क्यों की गई? क्या खरीद से पहले उसका ट्रायल नहीं किया गया? क्या अधिकारियों ने केवल कागजी प्रक्रिया पूरी कर लाखों रुपये खर्च कर दिए?

सवालों के घेरे में जिम्मेदार अधिकारी

यह मामला सीधे तौर पर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। शासन की मंशा भले ही किसानों को सशक्त बनाने की हो, लेकिन जमीनी स्तर पर योजनाएं भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही हैं।

यदि मशीन काम की नहीं थी तो भुगतान कैसे हुआ? किस आधार पर स्वीकृति दी गई? और सबसे बड़ा सवाल—क्या इस पूरी प्रक्रिया में कमीशनखोरी की बू तो नहीं आ रही?

किसानों के साथ अन्याय

किसान पहले ही प्राकृतिक आपदाओं, महंगाई और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं भी यदि कागजों तक सीमित रह जाएं, तो यह किसानों के साथ खुला अन्याय है।

जन अपेक्षा है कि इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही मशीन को तत्काल उपयोग योग्य बनाया जाए या उसकी जवाबदेही तय कर सार्वजनिक धन की वसूली की जाए।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर क्या कदम उठाता है—या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह धूल फांकता रह जाएगा?

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