ग्रामीणों के हक पर डाका! गांव के नाम पर शहर में चल रहे कियोस्क, जिम्मेदार मौन
दैनिक रेवांचल टाइम्स | घुघरी (मंडला)तहसील मुख्यालय घुघरी में “ग्रामीण सेवा” के नाम पर खुला खेल चल रहा है। जिन कियोस्क सेंटरों को गांवों में संचालित होना था, वे खुलेआम मुख्यालय में चल रहे हैं—और जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ देखकर भी चुप्पी साधे हुए हैं।
गांव के नाम पर शहर में कारोबार
मामला सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कियोस्क सेंटरों से जुड़ा है, जिनकी अनुमति ग्रामीण क्षेत्रों के लिए दी गई थी, ताकि गांवों में बैंकिंग सुविधा पहुंच सके। लेकिन हकीकत यह है कि ये कियोस्क सेंटर मुख्यालय में ही संचालित हो रहे हैं।
सवाल यह है कि जब सुविधा गांव के लिए है, तो संचालन शहर में क्यों?
क्या यह नियमों की खुली अनदेखी नहीं?
हर लेन-देन पर “कट”—गरीबों से वसूली
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां बिना “अतिरिक्त पैसे” दिए कोई काम नहीं होता। ₹1000 निकालने पर ₹10 से ₹20 तक वसूली बिना पैसे दिए काम करने से साफ इनकार यानी गरीब ग्रामीण, जो अपनी मेहनत की कमाई निकालने आते हैं, उनसे ही अवैध वसूली की जा रही है।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
यह सब कोई छिपा हुआ खेल नहीं है—स्थानीय लोगों को भी पता है और अधिकारियों को भी। फिर भी कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है:
क्या विभागीय अधिकारी जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं? क्या इस खेल में ऊपर तक मिलीभगत है?
आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध वसूली जारी है? ग्रामीण बोले—गांव में सुविधा नहीं, शहर में शोषण
ग्रामीण रामलाल (नैझर) का कहना है:
“हमारे गांव की लोकेशन है, लेकिन हमारे गांव में कोई कियोस्क नहीं आता। हमें पैसे निकालने मुख्यालय जाना पड़ता है, और वहां भी अलग से पैसे लिए जाते हैं।”
यह बयान साफ बताता है कि जिनके लिए योजना बनी, वही सबसे ज्यादा परेशान हैं।
सिस्टम पर बड़ा सवाल
सरकार की मंशा ग्रामीणों को उनके गांव में बैंकिंग सुविधा देने की थी, लेकिन जमीनी हकीकत में यह योजना भ्रष्टाचार और मनमानी की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। अगर कियोस्क संचालकों को शुल्क ही लेना है, तो क्या उन्हें गांव में जाकर सेवा नहीं देनी चाहिए? या फिर “ग्रामीण सेवा” सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?
कार्रवाई कब?
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करे:
कियोस्क सेंटरों की लोकेशन और संचालन की सत्यता जांची जाए
अवैध वसूली करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो ग्रामीणों को उनके गांव में ही बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाए
वही आख़िर कब इस ओर ध्यान देंगे नगर के जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि घुघरी में यह मामला सिर्फ कियोस्क सेंटर का नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का आईना है। जब योजनाएं कागजों में और शोषण जमीनी हकीकत बन जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है—क्या जिम्मेदार जागेंगे या ग्रामीण यूं ही लुटते रहेंगे?