लोकायुक्त की दस्तक के बाद ‘गायब’ हुआ आरटीओ अमला

 

हाईवे पर छाया सन्नाटा या तूफान से पहले की शांति?

दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला/जबलपुर।मंडला–रायपुर नेशनल हाईवे से लेकर जबलपुर नागपुर मार्ग पर बरगी और जबलपुर के पनागर क्षेत्र तक, जहां कभी आरटीओ विभाग की “सक्रियता” ट्रक चालकों के लिए सिरदर्द बनी हुई थी, वहां अब अचानक सन्नाटा पसरा हुआ है। बीते लंबे समय से ट्रक चालकों और वाहन मालिकों द्वारा आरोप लगाए जा रहे थे कि जांच के नाम पर अवैध वसूली का खेल खुलेआम चल रहा है।

लेकिन हाल ही में लोकायुक्त की कार्रवाई में बरगी थाना क्षेत्र के पास दो आरटीओ कर्मचारियों को कथित रूप से रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद जैसे पूरा अमला ही गायब हो गया। जिन जगहों पर रोजाना “चेकिंग” के नाम पर वाहन रोके जाते थे, वहां अब न कोई अधिकारी दिख रहा है और न ही कोई कार्रवाई।

अब बड़ा सवाल यह उठता है कि—
क्या वाकई जांच के नाम पर चल रही अवैध वसूली के आरोप सही थे?
या फिर यह अचानक आई खामोशी सिर्फ एक अस्थायी विराम है?

ट्रक चालकों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमों के तहत ही हो रहा था, तो फिर लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद इतनी बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी अचानक क्यों गायब हो गए?

*“आरटीओ विभाग—अब आप दिखे तो जानें!”*

कहते हैं कि सरकारी विभाग कभी बंद नहीं होते, वे सिर्फ “सक्रिय” और “अति सक्रिय” होते हैं।
लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है—आरटीओ विभाग शायद “अदृश्य” हो गया है!

जहां पहले हर 50 से 60 किलोमीटर पर “जांच” की चेकपोस्ट दिखती थी, अब वहां हवा भी पूछ रही है—
“भाई, वो मास्क वाली मैडम और कार्यवाही के नाम पर डरा धमकाकर वसूली करने वाले बाबूजी किधर गए?”

*ट्रक चालक अब हैरान हैं—*

“पहले रुकने पर पैसे देने पड़ते थे, अब रुकने की वजह ही नहीं मिल रही!”
और यदि जांच की जाने वाली जगहों पर ट्रक ड्राइवर रुकते भी है तो वहां पर रुक कर सुकून की सांसे लेते हुए आगे बढ़ते हैं।
लगता है लोकायुक्त की कार्रवाई कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि वह “सरकारी ध्यान योग” का ऐसा सत्र बन गई, जिसमें पूरा विभाग ध्यान लगाकर आत्मचिंतन में चला गया।
अब देखना यह है कि यह “मौन साधना” कब तक चलती है—
या फिर कुछ समय बाद वही अधिकारी नए अंदाज, नई जगह और नए “नियमों” के साथ फिर से अवतरित होंगे।

तो क्या फिर इसका निष्कर्ष यह निकाले की फिलहाल हाईवे पर शांति है, लेकिन यह शांति असली सुधार का संकेत है या तूफान से पहले की खामोशी—यह आने वाला समय ही बताएगा।

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