घुघरी थाना क्षेत्र में ‘नशा मुक्त’ अभियान फेल!
गली-कूचों से किराना दुकानों तक में बिक रही शराब, कार्रवाई के नाम पर हफ्ता वसूली अभियान

दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला|आदिवासी बहुल मंडला जिले में अबेध कारोबारियों के हौसले बुलंद नज़र आ रहें है जहाँ एक तरफ़ पूरे प्रदेश में पुलिस विभाग के द्वारा नशा मुक्ति अभियान का पखवाड़ा पुलिस मुख्यालय के आदेश अनुसार चलाया जा रहा है पर वह अभियान मंडला जिले के थाना घुघरी में लागू नहीं होता नज़र आ रहा है और लाइसेंसी देशी विदेशी शराब ठेकेदार के द्वारा पूरे क्षेत्र में पुलिस विभाग से साठगाठ कर गांव गाव में शराब चार पहिया वाहन से कुचियो के घर तक पहुंचा कर दी जा रही है, और यह सब जिला आबकारी विभाग और पुलिस के संरक्षण में कार्य चल रहा है
वही सूत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसील मुख्यालय घुघरी में शासन और प्रशासन की नाक के नीचे खुलेआम शराब का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। शासन भले ही “नशा से दूरी है ज़रूरी” जैसे अभियान चला रहा हो, लेकिन घुघरी में तो मानो यह अभियान पूरी तरह मजाक बनकर रह गया है।
शराब हर गली-नुक्कड़ पर, किराना दुकानों में भी बिक रही बोतलें
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक घुघरी कस्बे के साथ-साथ आसपास के गांवों में खुलेआम अंग्रेजी और कच्ची शराब का धंधा हो रहा है। किराना दुकानों से लेकर गली-मोहल्लों तक शराब आसानी से मिल रही है।
गांव-गांव तक शराब पहुंचाने का काम अब ठेकेदारों के कर्मचारी बोलेरो और अन्य वाहनों के जरिए कर रहे हैं, मानो शराब वितरण कोई आवश्यक सेवा हो!
> “एम्बुलेंस एक घड़ी देर से पहुंचे, लेकिन शराब की गाड़ी समय पर आ जाती है।”
‘नशा से दूरी’ सिर्फ कागज़ों में, पुलिस की प्राथमिकता चालान और हेलमेट चेकिंग
स्थानीय पुलिस सिर्फ उन्हीं पर कार्रवाई कर रही है जो जल्दबाज़ी में हेलमेट लगाना भूल जाते हैं या शराब पीकर गाड़ी चलाते मिलते हैं। वहीं, शराब बेचने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, जिससे स्पष्ट है कि उन्हें पुलिस का मौन संरक्षण प्राप्त है।
घुघरी बना ‘सेफ ज़ोन’ शराब कारोबारियों के लिए?
जिले के कई थाना क्षेत्रों में जहां आबकारी विभाग द्वारा अवैध शराब पर छापे मारे जा रहे हैं, वहीं घुघरी थाना क्षेत्र में लगातार चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। क्या यह क्षेत्र शराब कारोबारियों के लिए ‘सेफ ज़ोन’ बन चुका है?
दोहरे हत्याकांड से भी नहीं ली सीख, आरोपी था नशे में चूर
कुछ दिन पूर्व सलवाह चौकी अंतर्गत घुरघुटी में हुए दोहरे हत्याकांड का आरोपी शराब के नशे में बुरी तरह चूर था। मेडिकल जांच के दौरान उसे भर्ती करना पड़ा।
यह घटना दर्शाती है कि अवैध शराब किस कदर अपराध को जन्म दे रही है। लेकिन पुलिस और प्रशासन की मौन चुप्पी, कहीं न कहीं इस बढ़ते अपराध में साझीदार बनती दिख रही है।
आबकारी विभाग का अजीब रवैया – “ऑफिस आओ, लिखित दो, तभी कुछ करेंगे”
जब रेवांचल टाइम्स संवाददाता ने जिला आबकारी अधिकारी रामजी पांडेय से इस बारे में जानकारी लेनी चाही तो उनका जवाब था:
> “आप लिखित शिकायत दीजिए और ऑफिस आकर बताइए तो मैं कार्रवाई कर पाऊंगा… ऐसे फोन में आपको कोई जानकारी नहीं दे सकता।”
यह बयान स्पष्ट करता है कि अवैध शराब कारोबार को लेकर अधिकारी कितने गंभीर हैं, या यूं कहें कि कितना असहाय या उदासीन।
आखिर कब रुकेगा ये नशे का जाल?
प्रश्न यही है कि क्या नशा मुक्त अभियान सिर्फ फोटो खिंचवाने और चालान काटने तक सीमित रह जाएगा?
क्या मंडला जिले के युवा नशे की गर्त में यूं ही डूबते रहेंगे?
क्या प्रशासन शराब कारोबारियों की पकड़ से आज़ाद हो पाएगा?
जब तक जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों को निभाने के बजाय “हफ्ता वसूली” में व्यस्त रहेंगे, तब तक अवैध शराब का कारोबार यूं ही बेलगाम चलता रहेगा।
वही प्रशासन जागे, जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो और घुघरी को नशा मुक्त बनाने का वास्तविक प्रयास शुरू किया जाए।