अवैध कॉलोनी पर स्थानीय प्रशासन सहित जिला प्रशासन मेहरबान गरीब कॉलोनी के नाम पर लूट रहें नही मिल पा रही मुलभूत सुविधाएं
रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले में अवैध कॉलोनी और कालोनाइजर तेजी आबाद हो रही है और एक एक रुपये जोड़ कर गरीब जनता खुद के घर के सपने देख कर बर्बाद हो रहे है कालोनाइजर के द्वारा अच्छी सर्वसुविधायुक्त और सभी विभागों की अनुमति पूर्ण विकसित क्षेत्र बतलाकर लोगों के सपनो के घर मे पानी फेर कर मालामाल हो रहे और कॉलोनी कालोनाइजर को आबाद करने के पीछे स्थानीय प्रशासन के साथ साथ जिला प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है जहाँ पर प्राप्त शिकायत में कार्यावाही न करते हुए उन्हें अभयदान देकर जनता को लूटने छोड़ दिया है।

अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन मौन, पटवारियों की मिलीभगत से राजस्व को करोड़ों की चपत।
न स्लम एरिया का पता न रेरा पंजीयन और न ही सुविधाओ का पता है।
पड़ोसी जिले में हुई जम कर कार्यवाही।
मण्डला प्रसासन मोन क्यों है।।
अब शायद अति उच्च स्तर से हो सके मण्डला में आवेध कालोनियों पर जांच व कार्यवाही।
मण्डला, जिले भर में सैकड़ो की तादाद में अवैध कॉलोनियों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। लेकिन जिला प्रशासन कुभकर्णीय नीद से नही जाग पा रहा हैं। वही दूसरी इन अबैध कालोनाइजर पर कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं की गई है। जबकि हकीकत सबके सामने है ।
सूत्रों के अनुसार, इन कॉलोनियों के निर्माण में कुछ पटवारियों की सीधी संलिप्तता भी पाई गई है, जो जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। और अपना कमीशन सीधे बटोर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और जागरूक संगठनों द्वारा बार-बार प्रशासन का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करने की कोशिश की गई है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। जब लोग उच्च अधिकारियों या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की ओर रुख करते हैं, तो संबंधित विभाग शिकायत को रफा-दफा करने के लिए तमाम हथकंडे अपनाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन अवैध कॉलोनियों के कारण सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है, साथ ही भविष्य में मूलभूत सुविधाओं की कमी और शहरी अव्यवस्था का खतरा भी बढ़ रहा है।
अब तक यह सवाल, सवाल ही बना है की कब जिला प्रसासन इन अवेध कालोनियों के खिलाफ कार्यवाही करेगा। प्रसासन की अनदेखी के चलते लगातार कृषि भूमि का क्रंकीट व सिमेंटी करन हो रहा है।
मण्डला, महाराजपुर कटरा, बिंझिया, बिछिया, नैनपुर, बम्हनी, पिंडरई चिरईडोगरी जैसे नगर और क़स्बों में यह गोरखधंधा बन गया है जिसमे लाखो लगाओ अब अरबो कमाओ, क्योंकि न कोई नियम न कानून है । बस खेत खरीदो और उसे प्लाट बना कर बेच दो न कोई नियम न कोई कानून और न कोई अनुमति जब इनके कालोनाइजर की जेब में।
जबकि जिला प्रसासन अगर एक एक कालोनी की जांच करे तो उसके खजाने करोणों का राजस्व आ जाए।
परन्तु ऐसा लगता है यह राजस्व सरकार के खजाने की जगह कुछ जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी की जेबों तक ही सीमित रह गया है। बता दे कुछ कालोनियों का सीमांकन हो जाए तो सरकारी भूमि भी सामने आएगी । जिसमे कुछ पटवारियों ने खेल खेला है। और धड़ाधड़ रजिस्टर भी की जा रही है रजिस्ट्रार भी आँख मूंद का रजिस्टर कर रहे है न उन्हें शासकीय भूमि नजर आती है और न ही बंधक की भूमि उन्हें केवल फाइल के ऊपर का कमीशन नजर आता है।
अब देखना है कि आख़िर क्या अन्य जिलों में अबैध कॉलोनी और कॉलोनाइजर के ऊपर वैधानिक कार्यवाही सहित FIR तक कि जा रही पर ये मंडला जिले में लागू नही हो रही है और आखिरकार कब तक कुभकर्णीय नीद से जाग कर इन अवैध कारोबारियों जांच का शिकंजा कस पाएंगे या फिर इन्हें अभयदान देकर गरीबों की मेहनत से कमाई हुए पैसों पर कालोनाइजर राज करेंगे यह बड़ा सवाल।
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