आखिर कब रुकेगा पंचायतों में भ्रष्टाचार का खेल कौन लगायेगा लगाम?


ग्राम पंचायत डुडका में भ्रष्टाचार के बादल छाए सरपंच व सचिव पर भ्रष्टाचार करने के लगे गंभीर आरोप

सरपंच संतोषी धुर्वे ने अपने पुत्र और ससुर के खाते में डाली शासकीय राशि

रेवांचल टाइम्स – मंडला जिले की जनपद पंचायत बिछिया में भ्रष्टाचार ग़बन का बोलबाला है और लापरवाही का आलम इस कदर बढ़ चुका है कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्य अब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं। सरकारी योजनाओं के नाम पर लाखों करोडो रुपये खर्च दिखाए जा रहे हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर विकास की गति कहीं दिखाई नहीं देती। सरपंच, सचिव और उपयंत्रियों की मनमानी से ग्राम पंचायतों में विकास की गति सिर्फ कागजो तक ही सिमट कर रह गई है

वही सूत्रों से प्राप्त ताजा मामला बिछिया जनपद की ग्राम पंचायत डुडका का है, जहाँ सरपंच संतोषी धुर्वे, वर्तमान सचिव रुकमणी वरकडे और पूर्व सचिव रामप्रसाद धुर्वे पर शासकीय राशि के गबन और भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी है और उनके ऊपर गंभीर आरोप लगे हैं। कि ग्राम पंचायत के वार्ड क्रमांक 6 के पंच प्रवीण प्रजापति ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) बिछिया को लिखित शिकायत देकर ग्राम पंचायत डुडका में हुए वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की है। शिकायत में उन्होंने बताया कि पंचायत के नाम पर आए विकास कार्यों की राशि का सरपंच और सचिवों द्वारा मनमाने तरीके से दुरुपयोग किया जा रहा है।
बिना प्रस्ताव, बिना बैठक निकले जा रहे हैं रुपये शिकायत के अनुसार, पंचायत में बिना किसी मासिक बैठक, प्रस्ताव पारित किए, अथवा ग्राम सभा की अनुमति के सरपंच और सचिव द्वारा बैंक खातों से लाखों रुपये निकाले गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि विकास कार्यों का नाम लेकर बैंक से राशि तो नियमित निकाली जा रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई कार्य दिखाई नहीं देता।

सगे-संबंधियों के खातों में पहुँची पंचायत की राशि

वही शिकायत में यह भी उल्लेख है कि सरपंच संतोषी धुर्वे ने अपने पुत्र सुमित व्यापारी के नाम से फर्जी बिल तैयार करवाए। इन बिलों के माध्यम से पंचायत डुडका में सीसी सड़क मरम्मत, मटेरियल खर्च और अन्य रखरखाव कार्यों के नाम पर भुगतान दिखाया गया सरपंच संतोषी धुर्वे के द्वारा, जबकि असल में वह राशि उनके ससुर रामलाल धुर्वे के बैंक खाते में जमा करवाई गई। सरपंच सचिव के द्वारा ग्राम पंचायत में फर्जी बिल लगाकर बिल क्रमांक 13 के माध्यम से दिनांक 05/04/2024 को ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के नाम पर 55000 रू की राशि सुमित ट्रेडर्स के नाम पर से जारी कर अपने पुत्र को लाभ दिया गया है दिनांक 26/09/2023 को 146470 रू का बिल सुमित व्यापारी के नाम पर दिनांक 28/8/2023 को 21728 रु की राशि सुमित व्यपारी उसी दिनांक 28/8/2023 को 39800 रु का बिल सुमित व्यापारी 12/04/2023 को 18000 रु की राशि का बिल सुमित व्यापारी दिनांक 26/09/2023 को 32010 रु की राशि का बिल सुमित व्यापारी के नाम से लगभग 313008 तीन लाख तेरह हजार आठ रु की राशि सरपंच सचिव की साठगाँठ से सरपंच ससुर रामलाल धुर्वे के खाते में जमाकर शासकीय राशि का गबन किया गया है इसी तरह वर्ष 2022 से 2025 तक ग्राम पंचायत में कराए गए निर्माण कार्यों का किसी भी प्रकार का आय व्यय संबंधी लेखा जोखा की जानकारी नही दी जा रही है पंचायत में विभिन्न प्रकार के कार्य जैसे रख रखाव पंचायत भवन मरम्मत वा अन्य ख़र्च के नाम पर फर्जी बिल लगाए गए है सरपंच सचिव के द्वारा 2022 से 2025 तक लगभग 2200000 बाईस लाख रु की राशि का गबन किया गया है सरपंच सचिव के द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुँचाया गया है पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार की शिकायत अधिकारियों को कई बार की है। दस्तावेजी साक्ष्यों सहित शिकायतें प्रस्तुत कीं, मगर कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है । जांच अधिकारी शिकायतें लेकर उन्हें रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं, और दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नही की गई कागजों में पंचायत चमक रही है, लेकिन गांव में गड्ढे और टूटी सड़कें ही दिखाई देती हैं।”
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
वार्ड पंच प्रवीण प्रजापति ने कहा कि “हमने पंचायत में हुए घोटाले से जुड़े सभी दस्तावेज एसडीओ बिछिया को सौंपे हैं। पंचायत निधि का इस तरह निजी उपयोग किया जाना भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण है। दोषी सरपंच, सचिव और पूर्व सचिव पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जाए और संपूर्ण लेखा की जांच कराई जाए।
प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल
इस मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि जिला और जनपद स्तर के अधिकारी पंचायतों की नियमित जांच क्यों नहीं कर रहे हैं। विकास कार्यों की मॉनिटरिंग की व्यवस्था होने के बावजूद, अगर गबन जैसी घटनाएं हो रही हैं, तो यह प्रशासनिक लापरवाही का भी बड़ा उदाहरण है।
मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1993 के अनुसार, यदि कोई सरपंच या पंचायत अधिकारी वित्तीय अनियमितता करता है या शासकीय राशि का दुरुपयोग करता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल जांच और निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। परंतु व्यवहार में ऐसे मामले वर्षों तक जांच के नाम पर लंबित रहते हैं। डुडका पंचायत में हुए भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दी जाए। साथ ही, पंचायत के सभी विकास कार्यों की थर्ड पार्टी ऑडिट कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।ग्राम पंचायत डुडका का यह मामला केवल एक पंचायत का नहीं, बल्कि पूरे जिले में फैले भ्रष्टाचार की एक झलक है। जब तक प्रशासनिक स्तर पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक विकास योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगी और ग्रामीण जनता इसी तरह ठगी जाती रहेगी।

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