किसान की पुश्तैनी जमीन का हुआ फर्जी सीमांकन, पटवारी और ग्रामजनों की मिलीभगत से खेत में घुसपैठ, मारपीट और जबरन की तोड़फोड, किसान न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर, जिम्मेदार कोमे…

रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले के ग्राम पंचायत झुरगी पौड़ी, जनपद पंचायत मोहगांव के अंतर्गत चौकी चाबी क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां किसान सुकरत दास सोनवानी ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि पटवारी लाल सिंह उईके ने गांव के कुछ लोगों के साथ मिलकर उसके खेत का फर्जी सीमांकन कर दिया और सिर्फ आपसी रंजिश निकालने के लिए उसकी पुश्तैनी जमीन में घुसपैठ कर तोड़फोड़ की जा रही है। किसान सुकरत दास ने बताया कि उसके खेत में सरकारी नाला मौजूद हैं, लेकिन पटवारी ने कथित रूप से मिलीभगत करते हुए फर्जी तरीके से बदलाव कर सरकारी नाले को खेत के बीच से दिखा दिया, ताकि उसके खेत की जमीन पर गांव के कुछ प्रभावी लोग कब्ज़ा जमा सकें। किसान का आरोप है कि पूरे मामले में पटवारी पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सुकरत दास का कहना है कि मेरी गैरमौजूदगी में मेरी फेंसिंग तोड़ी गई, मेरे खेत में घुसकर मेढ बंधान को उखाड़ फेंका गया। मेरा पूरा परिवार डर और दहशत में है। गांव के कुछ लोग कलिका प्रसाद, प्रेम भवेदी, दुर्गेश भवेदी, कंसु मरकाम, बिरसिंह मरकाम, फागू मरकाम, मिथलेश मरकाम, शिवकुमार मरकाम और दयाराम भवेदी लगातार मारपीट, धमकी और परेशान कर रहे हैं।
किसान ने यह भी खुलासा किया कि पटवारी ने सीमांकन सही करने के नाम पर 5,000 रुपये की अवैध मांग की, जिसमें से 3,500 नकद और 1,500 रुपए फोनपे के माध्यम से वसूले गए। किसान ने इसके सबूत भी होने की बात कही है। इतना ही नहीं बरसात के समय से किसान के खेत में लगातार अवैध घुसपैठ, तोड़फोड़, मारपीट और धमकियों का सिलसिला जारी है। किसान सुकरत दास ने बताया कि मुझे आदिवासी होने का हवाला देकर एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी जा रही है, ताकि मैं चुप रह जाऊं और अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़ दूं।
किसान ने चौकी चाबी एवं तहसील मोहगांव के अधिकारियों से भी शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई न होने से उसने कलेक्टर और एसपी कार्यालय पहुंचकर न्याय की मांग की है। किसान के पास तोड़फोड़ का वीडियो फुटेज, भुगतान का प्रमाण और पूरी घटनाओं के सबूत मौजूद हैं, इसके बावजूद कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।

जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई?

एक तरफ सरकार किसानों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ एक गरीब किसान अपनी ही पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए महीनों से अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। यह सिर्फ सीमांकन का विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, भ्रष्टाचार और एक किसान को प्रताड़ित करने का गंभीर मामला है। किसान की मांग है कि फर्जी सीमांकन करने वाले पटवारी पर तत्काल निलंबन और FIR साथ ही खेत में घुसपैठ और मारपीट करने वालों पर सख्त कार्रवाई को जाए। मेरी जमीन की सत्यापन सहित निष्पक्ष सीमांकन की जाए। परिवार को सुरक्षा और न्याय की गारंटी मिल सके। अब देखने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में कब कार्रवाई करता है?
क्या एक गरीब किसान को उसकी पुश्तैनी जमीन पर न्याय मिल पाएगा या फाइलों में ही उसकी आवाज दबा दी जाएगी? यह मामला प्रशासनिक संवेदनशीलता और निष्पक्षता दोनों की कठोर परीक्षा बन गया है।

इनका कहना कि :-
शिकायत के आधार पर जांच की जाएगी, चौकी चाबी को शिकायत फॉरवर्ड किया गया है, और चौकी प्रभारी को निर्देशित किया गया है कि उचित जांच करे।
रजत सकलेचा,
पुलिस अधीक्षक मंडला

मैने किसी प्रकार की पैसे की मांग नहीं की है, मेरे खाते में अनेक तरह के पैसे आते रहते है, मुझे नहीं पता उन्होंने मेरे खाते में क्यों पैसे डाले है मैने कोई पैसे की मांग नहीं की है, ओर मैं फिर से सुकरात का सीमांकन करवा दूंगा। और गांव के लोगों को मैने नहीं बोला था तोड़फोड करने के लिए, उन्होंने खुद ही तोड़फोड़ किया है।
लाल सिंह उईके, पटवारी

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