शराबबंदी की पुकार… पर बेहोश पड़ा प्रशासन!

जनसुनवाई में अर्जी पर अर्जी, फिर भी जिम्मेदारों के कान पर जूँ तक नहीं रेंगी

रेवांचल टाईम्स – मंडला जिले में शराबबंदी की मांग अब सिर्फ आवाज नहीं रही, यह व्यापक जनआंदोलन के रूप में उभर चुकी है। ग्रामीण जनता, महिलाएँ, नशे से टूटे परिवार—सभी बार–बार प्रशासन से एक ही विनती कर रहे हैं:
“शराब बंद करो… हमारे घर बचाओ।”
लेकिन शासन–प्रशासन की हालत ऐसी है मानो गहरी बेहोशी में पड़ा हो।
न सुनवाई हो रही है, न कार्रवाई।
जनसुनवाई में दर्जनों–सैकड़ों आवेदन हर सप्ताह जमा हो रहे हैं, पर फाइलें आगे बढ़ने से पहले ही सरकारी ठंडे बस्ते में पहुंच जा रही हैं।
जिले में स्थिति यह है कि
सरकार की अनुमति से चल रही अधिकृत शराब दुकानें
और अधिकारियों के संरक्षण में फल–फूल रहा अवैध शराब कारोबारदोनों मिलकर ग्रामीण जीवन को बर्बाद कर रहे हैं।
ग्राम पंचायतों से लेकर दुरूह वन क्षेत्रों तक, हर तरफ से एक ही आवाज उठ रही है।
शराबबंदी लागू करो!
लेकिन प्रशासन की प्रतिक्रिया शून्य। न कोई रणनीति, न कोई कार्रवाई, और न ही कोई संवेदनशीलता।ग्रामीणों ने बताया किअवैध शराब का आतंक बढ़ रहा हैनशे में घरेलू हिंसा और अपराध बढ़ रहेयुवा पीढ़ी नशे की चपेट में आ रही हैपरिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से टूट रहे हैंइसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं, जबकि जनसुनवाई का मंच अब शराबबंदी की मांगों से भर चुका है।जिला प्रशासन की निष्क्रियता ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया हैक्या मंडला में शराबबंदी की मांग सिर्फ जनता की समस्या है,
या सरकार के राजस्व का जुगाड़ ज्यादा महत्वपूर्ण है?ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है।
यदि जल्द ही शराबबंदी की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए,
तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।मंडला की जनता की पुकार स्पष्ट है—शराब बंद करो… वरना प्रशासन की नींद हम जगाएंगे!

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