जनता बेहाल, प्रशासन बेपरवाह: मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है जिला, जिम्मेदार मौन

दैनिक रेवांचल टाईम्स- मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिला जो आजादी के दशकों के बाद भी विकास कहा हुआ कब हुआ और कब होगा ये जनता जनना चाह रही है की जो विकास कागज़ों और शासन की पोर्टलो में नजर आ रहे है वह जमी में आख़िर क्यो नजर आ रहे है और जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी कब तक होस में आईगे जिससे वनाचंल और दूरदराज में निवासरत गरीब ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं कब तक मिल पायेगी जहाँ एक ओर सरकार “सुशासन” और “जनकल्याण” के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर पर मंडला की ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जिले के कई इलाकों में सड़क, पानी, नाली, बिजली, स्वास्थ्य,शिक्षा – जो चाहें चुनें की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है, लेकिन जिला प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समस्या कोई नई नहीं है। कई बार शिकायतें, आवेदन और मौखिक आग्रह किए गए, लेकिन न तो निरीक्षण हुआ और न ही समाधान।
बरसात के मौसम में जैसे: सड़कों पर जलभराव, नालियों का ओवरफ्लो, कीचड़, गड्ढे जगह जगह कचरा लोगों के लिए मुसीबत बन चुका है। स्कूली बच्चों, बुज़ुर्गों और मरीजों को सबसे ज़्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
स्थानीय निवासी का कहना:
“चुनाव के समय अधिकारी और नेता सब कुछ ठीक करने का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब गायब हो जाते हैं। क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहा है?”
सबसे चिंताजनक बात यह है कि समस्या प्रशासन की जानकारी में होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। यह लापरवाही सीधे तौर पर जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।
यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी।
अब सवाल यह है कि—
क्या जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही हरकत में आएगा?
या फिर जनता की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई करेगा?
जनता अब जवाब चाहती है, सिर्फ आश्वासन नहीं।