मंडला में सरकारी गेहूं सड़ने का मामला उजागर, 21 महीने पुराना अनाज अब भी गोदामों में भरा
मंडला। जिले में सरकारी गेहूं की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। किसानों से खरीदा गया करीब 15 हजार क्विंटल गेहूं पिछले 21 महीनों से गोदामों में सड़ रहा है। समय पर रखरखाव, वेंटिलेशन और कीटनाशक छिड़काव नहीं होने के कारण अब इस गेहूं में फंगस लगने लगा है, जिससे इसकी गुणवत्ता पूरी तरह खराब हो चुकी है।
जानकारी के मुताबिक, जिले के नेनपुर, बड़वानी और बिछिया क्षेत्र के लगभग 9 गोदामों में यह गेहूं लंबे समय से भरा पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस भारी लापरवाही के चलते सरकारी खजाने को 50 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है।
गोदामों में हड़कंप, आनन-फानन में शुरू हुई सफाई
मामला उजागर होते ही संबंधित विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में गोदामों में रखे गेहूं की सफाई और छंटाई का काम शुरू कर दिया गया। हालांकि, सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुराने और खराब हो चुके इसी गेहूं को अब राशन दुकानों के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
1500 मीट्रिक टन गेहूं 21 महीने पुराना
नागरिक आपूर्ति निगम के डीएम हेमंत वर्मा ने स्वीकार किया कि गोदामों में करीब 1500 मीट्रिक टन गेहूं ऐसा है जो लगभग 21 महीने पुराना हो चुका है। उन्होंने बताया कि बोरियों में रखे गेहूं की ऊपरी परत आटा बनकर झड़ने लगी है, जो स्पष्ट रूप से उसकी खराब हालत को दर्शाता है।
उनका कहना है कि फिलहाल गोदाम संचालकों से गेहूं की सफाई कराई जा रही है और यदि इस लापरवाही से कोई नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी गोदाम संचालकों पर तय की जाएगी।
लैब टेस्ट के बाद ही होगा वितरण, फिर भी चिंता बरकरार
अधिकारियों का दावा है कि गेहूं की छंटाई और सफाई के बाद उसकी गुणवत्ता की लैब जांच कराई जाएगी। यदि रिपोर्ट में गेहूं खाने योग्य पाया गया, तभी उसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए राशन दुकानों पर भेजा जाएगा।